शुरू का दृश्य बहुत ही गहरा था। वह महिला बिस्तर पर लेटी थी और उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। पुरुष का चेहरा पास था, माहौल में कुछ छिपा हुआ लग रहा था। इस नाटक नकली का २५०, असली का खेल में रिश्तों की जटिलता बहुत अच्छे से दिखाई गई है। दर्शक के रूप में मैं इस रहस्य को जानने के लिए बेचैन हूं कि आखिर इन दोनों के बीच क्या चल रहा है और यह कहानी किस मोड़ पर जाएगी।
कार्यालय वाले दृश्य में महिला को समझौता पढ़कर बहुत झटका लगा। कागज पर लिखी रकम देखकर उसका चेहरा पीला पड़ गया। लगता है कंपनी में कुछ गड़बड़ चल रही है। नकली का २५०, असली का खेल की कहानी में यह मोड़ बहुत महत्वपूर्ण साबित होगा। कर्मचारी और मालिक के बीच का यह संघर्ष आगे जाकर कहां ले जाएगा, यह देखना दिलचस्प होगा और दर्शक इसका इंतजार करेंगे।
हल्के रंग के कपड़े वाले मालिक का गुस्सा देखकर डर लग रहा था। वह चिल्ला रहे थे और फिर अचानक छाती पकड़कर बैठ गए। स्वास्थ्य की समस्या होना नाटक को और गंभीर बना देता है। नकली का २५०, असली का खेल में भावनाओं का यह उबाल बहुत प्रभावशाली लगा। क्या यह गुस्सा सही था या कोई साजिश? यह सवाल मन में बना हुआ है और हमें जवाब चाहिए।
जब मालिक ने दवा की शीशी निकाली और पानी पिया, तो लगा कि मामला गंभीर है। उस महिला ने चुपचाप सब देखा, उसके चेहरे पर चिंता थी। नकली का २५०, असली का खेल में ऐसे छोटे विवरण बहुत बड़ी कहानी कहते हैं। कार्यालय की राजनीति में स्वास्थ्य भी दांव पर लग सकता है, यह दृश्य बहुत यादगार बन गया है मेरे लिए और मैं इसे बार बार देखना चाहूंगा।
हॉल में खड़े युवक का प्रवेश भी रहस्यमयी था। उसने अच्छे कपड़े पहने थे और चेहरे पर हैरानी थी। शायद उसे किसी बात की भनक लगी है। नकली का २५०, असली का खेल में हर किरदार की अपनी कहानी लगती है। यह युवक किस तरफ है, यह अभी साफ नहीं है लेकिन उसकी मौजूदगी से कहानी में नया रंग आ गया है और उत्सुकता बढ़ी है।
ग्रे रंग की पोशाक और बिंदीदार पट्टा वाली महिला का अभिनय बहुत स्वाभाविक लगा। उसने गुस्से और हैरानी को बहुत अच्छे से व्यक्त किया। नकली का २५०, असली का खेल में उसका किरदार बहुत मजबूत लग रहा है। वह सिर्फ चुपचाप खड़ी नहीं रही बल्कि मालिक से बहस भी की। ऐसे किरदार दर्शकों को पसंद आते हैं जो अपनी आवाज उठाते हैं और सच बोलते हैं।
बिस्तर वाले दृश्य में महिला के गले में मोती की माला बहुत चमक रही थी। यह सजावट उसकी स्थिति को और भी नाजुक बना रही थी। नकली का २५०, असली का खेल में पोशाक और सामान का उपयोग बहुत सोच समझ कर किया गया है। यह माला शायद किसी खास मौके की निशानी हो सकती है जो आगे की कहानी में काम आएगी और राज खोलेगी।
कार्यालय के कमरे में जो बहस हुई, वह बहुत तेज थी। मालिक मेज पर हाथ मार रहे थे और महिला डटी हुई थी। नकली का २५०, असली का खेल में सत्ता के संतुलन को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। ऊपर वाले का दबदबा और नीचे वाले का विरोध, यह पुराना संघर्ष हमेशा काम करता है। मुझे अगली कड़ी देखने की जल्दी है कि कौन जीतता है।
लगता है कि कंपनी के कागजात में कुछ छिपा हुआ है। महिला को समझौता पढ़कर जो झटका लगा, वह साबित करता है कि सब कुछ वैसा नहीं है जैसा दिखता है। नकली का २५०, असली का खेल की थीम ही धोखे और सच्चाई के इर्द गिर्द घूमती है। हर कोई कुछ छिपा रहा है और यह दर्शकों के लिए एक पहेली बन गया है जो सुलझनी बाकी है जल्दी।
इस कड़ी के अंत में सब कुछ अधूरा लग रहा था। मालिक की तबीयत खराब हुई और महिला चुपचाप खड़ी रही। नकली का २५०, असली का खेल में अधूरे अंत का उपयोग बहुत अच्छा है। अब सबकी नजरें इस बात पर हैं कि आगे क्या होगा। क्या महिला नौकरी छोड़ देगी या बदला लेगी? यह अनिश्चितता ही इस कार्यक्रम की जान है और मुझे पसंद है।