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नकली का 250, असली का खेलवां54एपिसोड

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नकली का 250, असली का खेल

रणवीर मेहता, मेहता ग्रुप का असली बेटा, बिछड़ने के बाद घर लौटता है। वह परिवार के लिए जान लगा देता है और कंपनी को सालाना तीस हज़ार करोड़ दिलाता है, लेकिन सालाना जश्न पर नकली बेटा सिद्धांत उसे सिर्फ 250 युआन का बोनस देकर बेइज्जत करता है और उसके अपने माता-पिता व बहन भी नकली का साथ देते हैं। अब रणवीर का धैर्य टूट चुका है, वह घर छोड़कर मेहता ग्रुप को सबक सिखाने की तैयारी करता है। क्या रणवीर अपने ही परिवार को हरा पाएगा? और यह लड़ाई कहाँ तक जाएगी?
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इस एपिसोड की समीक्षा

कार्ड का खेल और परिवार का सच

इस नाटक में तनाव बहुत ज्यादा है। पिता का गुस्सा देखकर डर लग रहा था, लेकिन अंत में काला कार्ड देकर सबको चौंका दिया। बेटे की मुस्कान में चालाकी साफ दिख रही थी। माँ की चिंता और बहू की आंखों में आंसू दिल को छू गए। इस मंच पर देखने का अनुभव बहुत अच्छा रहा। नकली का २५०, असली का खेल की कहानी में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। अगला भाग कब आएगा?

गुस्से और लालच का खेल

लाल शर्ट वाले बेटे की हरकतें संदेह पैदा करती हैं। पिताजी शुरू में बहुत क्रोधित थे, पर फिर भी पैसे दे दिए। यह परिवारिक झगड़ा बहुत गहरा लग रहा है। गुलाबी पोशाक वाली लड़की बेचारी बीच में फंस गई। हर पल में नया मोड़ है। नकली का २५०, असली का खेल देखते समय लगा कि असली रिश्ते पैसे से बड़े हैं या नहीं। अभिनय बहुत दमदार है।

माँ का दर्द और बेटे की चाल

काली साड़ी वाली माँ का गुस्सा जायज लग रहा था। उन्होंने परिवार को बचाने की कोशिश की। लेकिन बेटे ने कार्ड लेते ही जो भाव बनाए, वो देखकर गुस्सा आया। पिता की मजबूरी साफ झलक रही थी। यह कार्यक्रम बहुत ही रोचक है। नकली का २५०, असली का खेल में हर किरदार ने अपनी भूमिका निभाई है। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आ रही है।

अमीरी का घमंड या मजबूरी

बड़े घर की कहानी हमेशा दिलचस्प होती है। यहाँ भी वही है। पिता का रवैया बदलता हुआ दिखा। पहले गुस्सा, फिर समझौता। कार्ड देना किसी शर्त की तरह लग रहा था। लड़की की चुप्पी सबसे ज्यादा बोझिल थी। नकली का २५०, असली का खेल की पटकथा बहुत मजबूत है। हर संवाद में वजन है। मैं अगला भाग देखने के लिए बेताब हूं।

रिश्तों की कीमत क्या है

क्या पैसे से सब कुछ खरीदा जा सकता है? इस दृश्य में यही सवाल उठता है। बेटे की खुशी देखकर लगता है उसे बस पैसा चाहिए। पिता की आंखों में निराशा थी। माँ बस देखती रहीं। यह कहानी समाज का आईना है। नकली का २५०, असली का खेल ने सोचने पर मजबूर कर दिया। कलाकारों ने बहुत अच्छा काम किया है।

चौंकाने वाला अंत

मैंने सोचा था पिता बेटे को घर से निकाल देंगे, पर उन्होंने कार्ड थमा दिया। यह मोड़ बहुत भारी था। लड़की का चेहरा उतर गया था। चश्मे वाले लड़के की चालाकी देखते ही बनती थी। इस मंच पर ऐसे कार्यक्रम कम ही मिलते हैं। नकली का २५०, असली का खेल की लोकप्रियता बढ़ रही है। मुझे यह सामग्री बहुत पसंद आया।

परिवारिक कलह का सच

घर की लड़ाई बाहर नहीं दिखनी चाहिए, पर यहाँ सब खुल गया। पिता और बेटे के बीच की दूरी साफ दिख रही थी। माँ बीच में आकर सब संभालने की कोशिश कर रही थीं। गुलाबी कपड़ों वाली बहू सबसे ज्यादा परेशान लग रही थी। नकली का २५०, असली का खेल में भावनात्मक नाटक बहुत है। यह दृश्य देखकर मन भारी हो गया।

स्टाइल और अभिनय का कमाल

कपड़े और मंच सज्जा बहुत शानदार हैं। हर किरदार की वेशभूषा किरदार को सूट कर रही थी। लाल शर्ट वाला बेटा बहुत स्टाइलिश लग रहा था। अभिनय में कोई कमी नहीं थी। गुस्से और खुशी के भाव सही थे। नकली का २५०, असली का खेल की गुणवत्ता भी अच्छी है। मुझे यह दृश्य अनुभव बहुत पसंद आया।

शक्ति का गलत इस्तेमाल

काला कार्ड सिर्फ पैसे नहीं, शक्ति भी दिखाता है। बेटे ने इसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया। पिता की मजबूरी साफ दिख रही थी। माँ की आंखों में आंसू थे। यह कहानी बताती है कि पैसा रिश्ते तोड़ सकता है। नकली का २५०, असली का खेल में यह संदेश बहुत मजबूत है। मैं इस कार्यक्रम को सबको सुझाऊंगी।

अगले भाग का इंतजार

यह अधूरा अंत बहुत तंग करने वाला था। कार्ड देने के बाद क्या होगा? क्या लड़की साथ रहेगी या चली जाएगी? पिता का गुस्सा शांत होगा या नहीं? सवाल बहुत हैं। नकली का २५०, असली का खेल का अगला भाग जल्दी आना चाहिए। इस मंच पर इंतजार करना मुश्किल हो रहा है। कहानी में दम है।