मिहिर वोस पर शेफ खेतान जो भी गुस्सा निकाल रहे हैं, वह सब वह चुपचाप सह रहा है। सब्जी काटने के तरीके पर इतना शोर मचाना थोड़ा अतिरंजित लगा। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में दिखाया गया है कि कैसे एक गलती पूरे माहौल को खराब कर देती है। मिहिर की आंखों में जो शांति है, वही असली ताकत है।
सलीम गफूर के लिए चिकन एप्पल रिसोटो बनाने की तैयारी में पूरा किचन तनाव में है। अदा और बाकी स्टाफ की घबराहट साफ दिख रही है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में यह दिखाया गया है कि वीआईपी गेस्ट के आने से कैसे सबकी नींद उड़ जाती है। शेफ खेतान का परफेक्शन के लिए पागलपन देखने लायक है।
शेफ खेतान ने मिहिर वोस को चाकू से धमकाते हुए जो डायलॉग बोले, वह काफी डरावने थे। २५० ग्राम के टुकड़ों में बांट दूंगा वाली बात ने रोंगटे खड़े कर दिए। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में हिंसा का यह रूप थोड़ा अजीब लगा। किचन में काम करना इतना खतरनाक नहीं होना चाहिए।
शेफ खेतान बार-बार सलाद बनाने के लिए दबाव बना रहे हैं, जबकि मिहिर वोस सब्जी काटने में लगे हैं। यह टकराव काफी दिलचस्प है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में टाइम मैनेजमेंट और प्रेशर हैंडलिंग का अच्छा उदाहरण दिखाया गया है। शेफ की जल्दबाजी में गलतियां होना स्वाभाविक है।
शेफ खेतान खुद को असली शेफ बता रहे हैं, लेकिन उनका व्यवहार एक मेंटर जैसा नहीं लग रहा। मिहिर वोस की खामोशी ज्यादा प्रभावशाली है। (डबिंग) बदले की आग में पका खाना में असली हुनर और दिखावे के बीच का फर्क साफ दिखता है। असली शेफ ऐसे काम करते हैं वाला डायलॉग व्यंग्यात्मक लगा।