PreviousLater
Close

(डबिंग) ठुकराया हुआ इक्कावां8एपिसोड

2.0K2.5K

(डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का

राहुल को उसके अमीर परिवार ने 18 साल तक नकार दिया था। उसने एक रहस्यमय जुआरी आदित्य से ताश के खेल की बारीकियाँ सीखीं। अब वह सच्चाई जानने वापस लौटता है, और देखता है कि सिंह परिवार शर्मा परिवार के खिलाफ जानलेवा जुआ में फंसा हुआ है। सब उसका मजाक उड़ाते हैं, लेकिन राहुल अपनी कला दिखाता है, कमाल के करतब करके बाजी पलट देता है। वह बहिष्कृत से परिवार का रक्षक और उत्तरी अमेरिका का जुआरी बादशाह बन जाता है।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

जुए की मेज पर मौत का खेल

करण के चेहरे का वो डर देखकर रोंगटे खड़े हो गए। जब उसे लगा कि चार इक्के जीत जाएंगे, तभी नीली सूट वाले शख्स ने पलटवार किया। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में ऐसा मोड़ किसी ने नहीं सोचा था। विक्रम की बेबसी और दीपक की गुस्से भरी आंखें सब कुछ बता रही थीं। क्या सच में सिंह खानदान के हाथ कट जाएंगे? ये सस्पेंस बरकरार है।

नीली सूट वाले की चालबाजी

इस शख्स की मुस्कान में जहर घुला हुआ है। उसने जानबूझकर दांव बढ़ाया ताकि करण गलती करे। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का का क्लाइमेक्स देखकर दिमाग घूम गया। स्ट्रेट फ्लश निकलना कोई संयोग नहीं लग रहा। शर्मा खानदान अब खतरे में है। विक्रम को पकड़कर ले जाने का सीन बहुत दर्दनाक था। क्या कोई बचाएगा इनकी इज्जत?

करण की गलती या धोखा?

करण को इतना जल्दी ऑल इन नहीं करना चाहिए था। उसके पिता विक्रम ने मना किया फिर भी उसने जिद की। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में परिवार की जिद ही मुसीबत बन गई। वो ब्रेसलेट देखकर दीपक की आंखें फटी रह गईं। क्या इसमें कोई पुरानी दुश्मनी छिपी है? सिंह खानदान की बर्बादी का मंजर दिल दहला देने वाला था।

परिवार की इज्जत का सवाल

जब बात खून-खराबे की हो तो जुआ सिर्फ बहाना होता है। शर्मा और सिंह खानदान की दुश्मनी अब सड़क पर आ गई है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में दिखाया गया है कि लालच कैसे इंसान को अंधा कर देता है। दीपक की चीखें और वो महिलाओं का डर असली लग रहा था। आगे क्या होगा ये जानने की बेचैनी है।

आखिरी पत्ते का खेल

चार इक्के पर भरोसा करना करण की सबसे बड़ी भूल थी। सामने वाले ने ठंडे दिमाग से खेल खेला। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का का ये ट्विस्ट मेरी समझ से बाहर है। क्या गड्डे में हेराफेरी हुई थी? विक्रम की गर्दन पर चाकू देखकर सांस रुक गई थी। अब शर्मा खानदान का राज कैसे बचेगा? ये सवाल हर किसी के मन में है।

कैसीनो का खौफनाक माहौल

रोशनी से सजा ये कैसीनो असल में मौत का मुंह है। हर चेहरे पर नकाब और हर पत्ते में धोखा। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का की सिनेमेटोग्राफी बहुत गहरी है। जब नीली सूट वाले ने चाकू निकाला तो हॉल में सन्नाटा छा गया। दीपक का वो आखिरी शॉट बहुत प्रभावशाली था। क्या वो ब्रेसलेट किसी राज की कुंजी है?

संवादों में छिपी तलवार

हर डायलॉग जैसे वार कर रहा था। हिम्मत तो है मिस्टर सिंह वाली लाइन रोंगटे खड़े कर देती है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में संवाद बहुत भारी हैं। विक्रम ने कहा करण बच्चा नहीं है, पर वो गलत साबित हुआ। अब सिंह खानदान के हाथ मेज पर रखने का हुक्म हुआ है। ये जंग सिर्फ पत्तों की नहीं है।

बाप का दर्द और बेटे की जिद

विक्रम की आंखों में बेबसी साफ दिख रही थी। बेटे को बचाना चाहते थे पर मजबूरी थी। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का ने परिवार के रिश्तों को कसौटी पर कस दिया। करण की शर्मिंदगी देखकर बुरा लगा। क्या वो उस ब्रेसलेट को पहचान गया था? दीपक की चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी। ये कहानी आगे बढ़नी चाहिए।

विलेन की एंट्री धमाकेदार

नीली सूट वाला शख्स किसी खलनायक से कम नहीं लग रहा। उसकी हंसी में पागलपन है। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का में विलेन बहुत ताकतवर दिखाया गया है। उसने सिर्फ जुआ नहीं जीता, इज्जत भी छीनी। सुरक्षा कर्मियों का तरीका बहुत खूंखार था। अब शर्मा परिवार के पास कोई रास्ता बचा है या सब खत्म हो गया? ये देखना बाकी है।

बदले की आग कैसे भड़ेगी

ये अंत नहीं बल्कि एक नई लड़ाई की शुरुआत है। ब्रेसलेट वाला राज जरूर खुलेगा। (डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का के अगले भाग की उम्मीद बढ़ गई है। दीपक की आंखों में बदला साफ दिख रहा था। विक्रम को छोड़ेंगे नहीं ये लोग। क्या करण अपनी गलती सुधार पाएगा? कहानी में अब और उतार-चढ़ाव आएंगे।