इस सीन में तनाव इतना बढ़ गया है कि सांस रुक सी जाती है। राहुल की आंखों में जो ठहराव है वो किसी अनुभवी खिलाड़ी जैसा लगता है। बूढ़े आदमी की धमकी ने खेल को खतरनाक मोड़ दे दिया है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में ऐसे पल बार बार देखने को मिलते हैं जो दिल की धड़कन तेज कर दें। काश हम भी उस मेज पर बैठे होते तो क्या करते?
ताश के पत्तों से ज्यादा तेज यहां जुबानें चल रही हैं। जब उंगली दांव पर लगी हो तो खेल साधारण नहीं रह जाता। राहुल ने जिस तरह से चुनौती स्वीकार की वो काबिले तारीफ है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का की कहानी में यह मोड़ बहुत अहम साबित होने वाला है। बांटने वाली महिला की चुप्पी भी कई सवाल खड़े करती है।
कैसीनो की चमक धमक के पीछे छिपी यह जंग किसी से कम नहीं है। बूढ़े खिलाड़ी की चालाकी और राहुल की हिम्मत का मुकाबला देखने लायक है। सबको लग रहा है कि राहुल हार जाएगा पर उसकी मुस्कान कुछ और ही कहानी कहती है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में ऐसे मोड़ ही जान हैं। कौन जीतेगा यह बाजी?
पत्तों की गड्डी याद रखना कोई मजाक नहीं है। राहुल की यह कला उसे भीड़ से अलग बनाती है। जब सामने वाला जानलेवा दांव लगा दे तो घबराना लाजिमी है पर यहां तो उल्टा माहौल है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का के इस कड़ी ने सबको हैरान कर दिया है। लाल कोट वाले आदमी की प्रतिक्रिया भी देखने वाली थी।
रिंग फिंगर की शर्त लगाकर खेल को नई ऊंचाई पर ले गए हैं। यह सिर्फ ताश का खेल नहीं बल्कि इंसान की पहचान का सवाल बन गया है। राहुल के चेहरे पर कोई डर नहीं है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में किरदारों की गहराई बहुत अच्छे से दिखाई गई है। पुरानी महिला की चिंता साफ झलक रही थी पर्दे पर।
जब तीन रानियां मेज पर खुलती हैं तो लगता है खेल खत्म हो गया। पर राहुल की आंखों में अभी भी जीत की चमक है। यह धैर्य और हिम्मत का बेहतरीन उदाहरण है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में हर सीन के बाद नया रहस्य खड़ा हो जाता है। दर्शक भी अब सांस रोके बैठे हैं कि आखिर क्या होगा।
बूढ़े आदमी की हंसी के पीछे छिपा खतरा कोई नहीं समझ पा रहा है। उसने जानबूझकर राहुल को चुनौती दी है। यह सिर्फ पैसे का खेल नहीं है बल्कि इज्जत का सवाल है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा रोमांचक है। कैमरे के कोण ने भी तनाव को बढ़ाया है बहुत अच्छे से।
काले लिबास में बांटने वाली महिला बिल्कुल पत्थर की मूरत लग रही थी। उसके हाथों में पत्तों का खेल ही सब कुछ तय करने वाला है। राहुल और बूढ़े आदमी के बीच की दुश्मनी साफ दिख रही है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में ऐसे संवाद हैं जो लंबे समय तक याद रहते हैं। माहौल इतना गंभीर है कि हंसी नहीं आ रही।
किंग ऑफ क्लब्स का पत्ता राहुल के हाथ में है या नहीं यह तो अंत में ही पता चलेगा। पर उसका आत्मविश्वास देखकर लगता है कि उसने कुछ योजना बनाया है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का के प्रशंसक के लिए यह सीन किसी खजाने से कम नहीं है। हर कलाकार ने अपनी भूमिका को बहुत अच्छे से निभाया है इसमें।
शुरुआत से लेकर अब तक का यह सबसे बड़ा चरमोत्कर्ष लग रहा है। जब दांव पर उंगली लगी हो तो कोई भी गलती माफ नहीं की जाती। राहुल की किस्मत का फैसला होने वाला है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का ने साबित कर दिया है कि वह श्रेष्ठ श्रृंखला है। हमें अगली कड़ी देखने का बेसब्री से इंतजार है अब।