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(डबिंग) ठुकराया हुआ इक्कावां7एपिसोड

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(डबिंग) ठुकराया हुआ इक्का

राहुल को उसके अमीर परिवार ने 18 साल तक नकार दिया था। उसने एक रहस्यमय जुआरी आदित्य से ताश के खेल की बारीकियाँ सीखीं। अब वह सच्चाई जानने वापस लौटता है, और देखता है कि सिंह परिवार शर्मा परिवार के खिलाफ जानलेवा जुआ में फंसा हुआ है। सब उसका मजाक उड़ाते हैं, लेकिन राहुल अपनी कला दिखाता है, कमाल के करतब करके बाजी पलट देता है। वह बहिष्कृत से परिवार का रक्षक और उत्तरी अमेरिका का जुआरी बादशाह बन जाता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

तनाव से भरा पोकर गेम

पोकर टेबल पर तनाव इतना बढ़ गया है कि सांस रुक जाती है। दीपक के हाथ में इक्के हैं पर करण की भविष्यवाणी सही साबित हो रही है। सिंह परिवार की इज्जत दांव पर लगी है और पिता का गुस्सा साफ दिख रहा है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में यह सीन देखकर रोंगटे खड़े हो गए। हर कार्ड के पलटने के साथ कहानी नया मोड़ लेती है। डीलर की लाल पोशाक और हरे टेबल का अंतर भी कमाल का है। असली जुआ पैसे का नहीं अहंकार का चल रहा है यहाँ।

करण की चुप्पी सब बोलती है

करण की शांत आंखें सब कुछ बता रही हैं। वह जानता है कि आगे क्या होने वाला है पर दीपक अहंकार में अंधा हो चुका है। नीले सूट वाला खिलाड़ी भी कम खतरनाक नहीं लग रहा। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का की कहानी में यह मोड़ सबसे रोमांचक है। जब पिता ने करण को वहां से जाने को कहा तो लगा अब सब बिगड़ जाएगा। पर जुआ तो खेलना ही था। डायलॉग बाजी में दम है और एक्टिंग लाजवाब।

दीपक का बड़ा जोखिम

दीपक का ऑल इन वाला डिसीजन बहुत बहादुरी भरा था या फिर बेवकूफी? उसके पिता चाहते हैं कि वह पीछे न हटे। सिंह परिवार का मामला है तो झुकना नामुमकिन है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में दिखाया गया यह जुआ सिर्फ ताश का नहीं रिश्तों का भी है। कैसीनो की रोशनी और पृष्ठभूमि संगीत ने माहौल को और गहरा कर दिया। मुझे यह सीन बहुत पसंद आया क्योंकि इसमें रहस्य बना हुआ है।

डीलर का जादू

डीलर महिला के हाथों का जादू देखते ही बनता है। स्क्रीन पर ताश के पत्ते चलते हैं तो लगता है हम भी वहीं बैठे हैं। करण की चेतावनी को नजरअंदाज करना दीपक को भारी पड़ सकता है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का का यह भाग रोंगटे खड़े करने वाला है। चार इक्के मिलने के बाद भी जीत पक्की नहीं होती यह सबक यहाँ मिलता है। स्ट्रेट फ्लश की संभावना ने सबकी नींद उड़ा दी है।

पिता पुत्र का तनाव

पिता और पुत्र के बीच का तनाव साफ झलक रहा है। पिता दीपक को बचाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। करण बीच में आकर सबको चौंका देता है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में किरदारों की गहराई बहुत अच्छी है। जब दीपक ने कहा कि वह पीछे नहीं हटेगा तो लगा अब तो लड़ाई पक्की है। चिप्स के ढेर बढ़ते जा रहे हैं और धड़कनें भी तेज हो रही हैं। यह सीन मिस करने वाला नहीं है।

नीले सूट वाली चाल

नीले सूट वाले खिलाड़ी की मुस्कान में छलावा है। वह जानता है कि जीत किसकी होगी। दीपक का आत्मविश्वास डगमगा रहा है पर वह दिखा नहीं रहा। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का की कहानी में हर डायलॉग मायने रखता है। साझा पत्तों के खुलने का इंतजार सबको है। करण की भविष्यवाणी सही होगी या दीपक की किस्मत चमकेगी यह देखना बाकी है। माहौल में बिजली सी दौड़ रही है।

कैसीनो का असली माहौल

कैसीनो का वातावरण इतना असली लगा कि मैं भी खेलने बैठ गया। दीपक की शर्ट और टाई का कॉम्बिनेशन बहुत शानदार है। पर उसकी आंखों में डर साफ दिख रहा था। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में दृश्यों पर खास ध्यान दिया गया है। जब पिता ने गुस्से में आवाज उठाई तो सन्नाटा छा गया। यह सिर्फ एक गेम नहीं बल्कि परिवार की प्रतिष्ठा का सवाल बन गया है। अगला भाग देखने की बेचैनी बढ़ गई है।

करण का रहस्यमयी लुक

करण की जींस की जैकेट वाला लुक साधारण है पर उसकी बातों में वजन है। वह सब कुछ जानता है पर चुप है। दीपक को उसकी बात माननी चाहिए थी। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में यह किरदार सबसे रहस्यमयी लग रहा है। पांचवां कार्ड कौन सा आएगा इसी पर सब कुछ टिका है। सिंह परिवार की दांव पर लगी इज्जत बचेगी या नहीं यह तो आगे पता चलेगा। मुझे यह रोमांच बहुत पसंद आ रहा है।

बड़ी शर्त का सीन

ताश के पत्तों की आवाज और चिप्स की खड़खड़ाहट से माहौल गरम है। दीपक ने सारी रकम लगा दी है अब वापसी का रास्ता नहीं है। विरोधी भी कम चालाक नहीं है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का में बड़ी शर्त वाला यह सीन यादगार बन गया है। पिता की डांट और दीपक की जिद के बीच करण फंसा हुआ है। कहानी में उतार चढ़ाव बहुत अच्छे तरीके से दिखाए गए हैं। हर फ्रेम में कुछ न कुछ नया है।

अंत की धमाकेदार तैयारी

अंत में जब दीपक ने सब कुछ दांव पर लगा दिया तो लगा अब खेल खत्म। पर करण की आंखें कुछ और ही कहानी कह रही हैं। स्ट्रेट फ्लश की संभावना अभी बाकी है। डबिंग ठुकराया हुआ इक्का का अंत बहुत धमाकेदार होने वाला है। सिंह परिवार का घमंड टूटने वाला है या फिर जीतेंगे यह देखना बाकी है। मुझे यह कहानी बहुत पसंद आ रही है और मैं इसे सबको सुझाव दूंगा। बस इंतजार है अगले सीन का।