इस दृश्य में तनाव की जो हवा है वो रोंगटे खड़े कर देती है। नायक का 'देव सरोवर' में उतरना और दस दिन तक कठोर तपस्या करना दिखाकर निकम्मा का राइज थ्रोन पलट ने साबित कर दिया है कि असली ताकत शारीरिक नहीं, आध्यात्मिक होती है। गुरु का शांत खड़ा होना और शिष्य का पानी से बाहर आकर बदल जाना, यह परिवर्तन देखने लायक है।
जब वो पानी से बाहर आता है और उसके माथे पर वह लाल निशान चमकता है, तो लगता है जैसे कोई देवता अवतरित हुआ हो। निकम्मा का राइज थ्रोन पलट के इस मोड़ पर एक्शन और ड्रामा का बेहतरीन संगम है। गुरु और शिष्य के बीच की चुप्पी में जो संवाद छिपा है, वो सिर्फ आँखों से समझ आता है। विजुअल्स बिल्कुल जादुई हैं।
लंबे बालों वाले गुरु का चेहरा देखकर लगता है कि वो किसी गहरे रहस्य को जानते हैं। जब शिष्य पानी में कूदता है, तो लगता है शायद वो डूब जाएगा, लेकिन निकम्मा का राइज थ्रोन पलट में तो हर पल एक नया ट्विस्ट है। दस दिन बाद का सीन जहाँ वो बाहर आता है, वहाँ की एक्टिंग और बैकग्राउंड म्यूजिक ने दिल जीत लिया।
शुरुआत में पानी का लाल होना और हड्डियों का दिखना किसी बुरे शगुन जैसा लगता था, लेकिन अंत में वही पानी शिष्य के लिए शक्ति का स्रोत बन गया। निकम्मा का राइज थ्रोन पलट की कहानी में यह प्रतीकात्मकता बहुत गहरी है। सफेद कपड़ों में भीगकर जब वो लड़ता है, तो लगता है जैसे सफेदी अब लाल रंग से डरती नहीं है।
पानी के अंदर और बाहर की लड़ाई के दृश्य बहुत ही तरल और सुंदर हैं। निकम्मा का राइज थ्रोन पलट में एक्शन को इतनी खूबसूरती से दिखाया गया है कि हर मूवमेंट एक नृत्य जैसा लगता है। गुरु का हमला और शिष्य का बचाव, दोनों के बीच की रसायन विज्ञान ने इस सीन को यादगार बना दिया है।
दस दिन तक उस गर्म पानी में रहना कोई मजाक नहीं है। निकम्मा का राइज थ्रोन पलट ने दिखाया कि कैसे दर्द और धैर्य इंसान को नया रूप दे सकते हैं। जब वो बाहर आता है और अपनी नई शक्ति का प्रदर्शन करता है, तो दर्शक के रूप में हम भी उसकी जीत महसूस करते हैं। यह दृश्य प्रेरणादायक है।
नायक की आँखों में जब वह लालिमा आती है, तो लगता है कि उसके अंदर का क्रोध अब बाहर आने को बेताब है। निकम्मा का राइज थ्रोन पलट के इस किरदार ने बिना ज्यादा बोले अपनी पीड़ा और ताकत दोनों दिखा दीं। गुरु का मुस्कुराना यह बताता है कि उसकी मेहनत रंग लाई है।
झरने का वह स्थान 'देव सरोवर' सच में किसी स्वर्ग जैसा लगता है, लेकिन वहाँ का खतरा भी उतना ही वास्तविक है। निकम्मा का राइज थ्रोन पलट के सेट डिजाइन और लाइटिंग ने इस दृश्य को एक अलग ही आयाम दिया है। धुंध और पानी का मिलन दृश्य को बहुत ही रहस्यमयी बनाता है।
इस पूरे सीक्वेंस में शायद ही कोई भारी-भरकम डायलॉग हो, फिर भी कहानी इतनी स्पष्ट है। निकम्मा का राइज थ्रोन पलट ने साबित किया है कि कभी-कभी चेहरे के भाव और शारीरिक भाषा हजार शब्दों से ज्यादा बोलती है। गुरु और शिष्य के बीच का यह मौन संघर्ष सबसे बेहतरीन हिस्सा था।
जब शिष्य गुरु को धक्का देता है और खुद को संभालता है, तो लगता है कि अब वह एक नए अध्याय की शुरुआत कर रहा है। निकम्मा का राइज थ्रोन पलट में यह परिवर्तन बहुत ही नाटकीय और रोमांचक है। सफेद कपड़े, लाल निशान और गीले बालों के साथ उसका नया रूप देखकर रोमांच होता है।