रसोइये ने बर्फ को गर्म चटनी के साथ परोसा, जो एक पुरानी लेकिन कम इस्तेमाल होने वाली तकनीक है। इससे पकवान का स्वाद बढ़ जाता है और तीखी महक कम हो जाती है। (पृष्ठध्वनि) बदले की आग में पका खाना में ऐसे प्रयोग देखकर लगता है कि खाना बनाना भी एक विज्ञान है। दर्शक इस अनोखे तरीके को देखकर दंग रह गए।
जब घड़ी ने ५:०७ से गिनती शुरू की, तो सबकी नजरें खाली कुर्सी पर टिक गईं। रसोइया लक्ष्य गायब था! क्या वह हार मान गया या कोई बड़ी योजना बना रहा है? (पृष्ठध्वनि) बदले की आग में पका खाना में ऐसे रोमांचक मोड़ देखकर दिल की धड़कन तेज हो जाती है। निर्णायकों के चेहरे पर चिंता साफ झलक रही थी।
नीली साड़ी वाली महिला और फूलों वाले कोट वाले निर्णायक की प्रतिक्रियाएं सबसे ज्यादा दिलचस्प थीं। वे हैरान भी थे और प्रभावित भी। (पृष्ठध्वनि) बदले की आग में पका खाना में ऐसे निर्णायकों को देखकर लगता है कि वे सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि कला को भी परख रहे हैं। उनकी आंखों में चमक देखकर लगता है कि वे कुछ खास देख रहे हैं।
रसोइये ने बिना किसी घबराहट के अपना काम किया, चाहे वह बर्फ को उछालना हो या चटनी डालना। उसका आत्मविश्वास देखकर लगता है कि वह जानता है कि वह क्या कर रहा है। (पृष्ठध्वनि) बदले की आग में पका खाना में ऐसे आत्मविश्वासी किरदार देखकर प्रेरणा मिलती है। उसकी हर हरकत में एक अलग ही जादू था।
दर्शकों के चेहरे पर आश्चर्य, खुशी और हैरानी सभी भाव एक साथ झलक रहे थे। कुछ तो खड़े होकर तालियां बजा रहे थे। (पृष्ठध्वनि) बदले की आग में पका खाना में ऐसे दर्शकों को देखकर लगता है कि वे सिर्फ देखने नहीं, बल्कि महसूस करने आए हैं। उनकी ऊर्जा पूरे कक्ष में फैली हुई थी।