PreviousLater
Close

(डबिंग) बदले की आग में पका खानावां35एपिसोड

like2.1Kchase3.9K

(डबिंग) बदले की आग में पका खाना

शेफ लक्ष्य खन्ना, जो कभी "कुकिंग के बादशाह" थे, अपनी पत्नी की कार दुर्घटना में मृत्यु के बाद टूट गए। अवसाद से वे बेघर हो गए और कुत्ते 'शेरू' के अलावा सब कुछ खो दिए। किचन में काम करते समय एक सु-शेफ ने उन्हें प्रताड़ित किया, एक दुष्ट व्यवसायी ने उन्हें वापसी के लिए मजबूर किया। विश्वासघात और शेरू की हत्या के बाद लक्ष्य ने बदला लेने के लिए अपना चाकू उठा लिया।
  • Instagram
इस एपिसोड की समीक्षा

राउंड 3 का असली विजेता

माधवन की जीत बिल्कुल सही थी, क्योंकि उसने बिना शोर मचाए अपना काम किया। वहीं दूसरी तरफ काले कोट वाला शेफ चिल्ला रहा था। डबिंग बदले की आग में पका खाना की यह एपिसोड बताती है कि असली हुनर चुपचाप बोलता है। जजों का फैसला देखकर लगता है कि न्याय हुआ है।

टीम का विश्वास टूटना

जब अपने ही साथी शर्मिंदा करें, तो इंसान अकेला पड़ जाता है। इस डबिंग बदले की आग में पका खाना में टीम का एकजुट होकर विरोध करना बहुत रियल लगा। लाल बालों वाली मैनेजर और बाकी शेफ्स का गुस्सा जायज था। ऐसे इमोशनल मोमेंट्स नेटशॉर्ट पर ही देखने को मिलते हैं।

जजों का ड्रामाई अंदाज

सफेद बालों वाले जज का स्टाइल और डायलॉग डिलीवरी कमाल की है। उन्होंने जिस तरह से विजेता घोषित किया, उसमें एक अलग ही चमक थी। डबिंग बदले की आग में पका खाना में ऐसे किरदार शो की जान होते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर यह सीन बार-बार देखने का मन करता है।

असली हुनर की पहचान

काले कोट वाले शेफ को लगा कि वह सब कुछ जानता है, लेकिन असलियत सामने आ गई। डबिंग बदले की आग में पका खाना में यह सीख मिलती है कि घमंड इंसान को अंधा बना देता है। माधवन की शांति और उसका काम ही उसकी ताकत बना। नेटशॉर्ट पर ऐसे मोटिवेशनल सीन मिलना दुर्लभ है।

रेस्टोरेंट की साख का सवाल

जब एक शेफ की वजह से पूरे रेस्टोरेंट का नाम खराब हो जाए, तो टीम का गुस्सा लाजमी है। इस डबिंग बदले की आग में पका खाना में प्रोफेशनलिज्म और पर्सनल इगो का टकराव बहुत अच्छे से दिखाया गया है। नेटशॉर्ट पर यह एपिसोड देखकर लगता है कि काम में ईमानदारी जरूरी है।

और भी शानदार समीक्षाएँ (5)
arrow down