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रणभूमि की रानी

अराजक गणराज्य काल में चन्द्रावती संघ की प्रमुख बबिता राठौड़ विश्वासघात का शिकार होकर भी साहस से उभरती है। राघव मेहता और सोनल चौहान की साज़िशों का सामना करते हुए वह अपने पिता वीरेंद्र सिंह राठौड़ से मिलती है। विक्रम राठौड़ और शत्रु शक्तियों के षड्यंत्रों का पर्दाफाश कर, वह राजेश्वरी देवी के साथ मिलकर चन्द्रावती संघ को पुनर्जीवित करती है और अंततः सेनापति बनकर राष्ट्र की रक्षा करती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

टूटे हुए वादे

इस दृश्य में क्विपाओ पहनी महिला की आंखों में जो दर्द है, वह शब्दों से बयां नहीं होता। जब उसने अंगूठी को हवा में पकड़ा, तो लगा जैसे उसने अपनी किस्मत को फिर से चुन लिया हो। रणभूमि की रानी में ऐसे मोड़ देखकर दिल दहल गया। सैनिक वर्दी वाले व्यक्ति की चुप्पी सब कुछ कह रही थी।

शादी में हंगामा

लाल जोड़े में दुल्हन खड़ी थी, लेकिन सबकी नजरें उस महिला पर थीं जो रो रही थी। परिवार के बुजुर्ग भी हैरान थे। यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं, बल्कि त्याग की भी लगती है। रणभूमि की रानी का यह भाग बहुत भावुक कर देने वाला था। बर्फ़ वाली रात का दृश्य सब कुछ स्पष्ट करता है।

बर्फ़ वाली रात

जब उसने उसे पैसे दिए थे, तो शायद उसने अपनी खुशियां बेच दी थीं। रेलगाड़ी के पास का वह दृश्य बहुत दर्दनाक था। अब शादी के मंडप में खड़ी होकर वह सब याद आ रहा होगा। रणभूमि की रानी की कहानी में यह मोड़ बहुत गहरा है। वर्दी वाले शख्स की मजबूरी साफ दिख रही थी।

अंगूठी का खेल

अंगूठी जब हवा में उड़ी और उसने उसे पकड़ लिया, तो लगा कहानी पलट गई। दुल्हन हैरान खड़ी थी और सैनिक गुस्से में चिल्ला रहा था। यह नाटक नहीं, असली जज्बात लग रहे थे। रणभूमि की रानी में ऐसे दृश्य देखने को मिलते हैं जो दिल पर चोट करते हैं। बहुत ही शानदार अभिनय था।

स्कूल वर्दी वाली लड़की

शुरुआत में जो लड़की विद्यालय वर्दी में खड़ी थी, उसकी नजरें भी कुछ छिपा रही थीं। शायद उसे सब पता था। इस तिकोने प्यार की कहानी में हर किरदार का अपना दर्द है। रणभूमि की रानी की पटकथा बहुत मजबूत लग रही है। हर चेहरे पर एक अलग कहानी लिखी थी।

गुस्से में सैनिक

वर्दी पहने व्यक्ति का गुस्सा देखकर लगा कि वह अपनी मजबूरी छिपा रहा है। जब वह चिल्लाया, तो पूरा माहौल तनावपूर्ण हो गया। शायद वह उस महिला को बचाना चाहता था या खुद को। रणभूमि की रानी में ऐसे संघर्ष बहुत देखने को मिलते हैं। भावनाओं का यह तूफान बहुत तेज था।

दादी मां का रोल

बुजुर्ग महिला की आंखों में चिंता साफ दिख रही थी। वह सब कुछ समझ रही थीं लेकिन चुप थीं। परिवार की इज्जत और प्यार के बीच का संघर्ष यहां दिखता है। रणभूमि की रानी में बड़ों का किरदार भी बहुत अहम है। उनकी चुप्पी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी।

पुराना जमाना और कपड़े

क्विपाओ और पुरानी वर्दियों का संगम बहुत खूबसूरत था। बर्फ़ गिरने का दृश्य और लाल लालटेन वाली शादी की सजावट ने माहौल बना दिया। रणभूमि की रानी की दृश्य कहानी बहुत अच्छी है। हर पल एक चित्र जैसा लग रहा था। देखने में बहुत सुहावना लगा।

आंसुओं का सैलाब

जब वह महिला रोई, तो लगा जैसे बारिश शुरू हो गई हो। उसका दर्द स्क्रीन के पार भी महसूस हो रहा था। यह सिर्फ एक शादी नहीं, दो टूटे दिलों की कहानी है। रणभूमि की रानी में ऐसे भावुक पल बहुत गहराई से दिखाए गए हैं। रुलाई आ गई देखकर।

आगे क्या होगा

अंगूठी पकड़ने के बाद अब कहानी किस मोड़ पर जाएगी? क्या दुल्हन बीच में आएगी या सैनिक सच बताएगा? यह रहस्य बना हुआ है। रणभूमि की रानी का अगला भाग देखने की बेसब्री बढ़ गई है। कहानी अभी अधूरी लग रही है। हर पल नया मोड़ ले रहा है।