सीन बदलते ही पूरी कहानी पलट गई। पहले वह शर्मिंदा हो रहा था, लेकिन अब मीटिंग रूम में वह सबसे ऊपर बैठा है। यह पावर डायनामिक देखकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना सीरीज में ऐसे मोड़ ही सबसे ज्यादा पसंद आते हैं जहाँ हीरो अपनी जगह बनाता है। उसकी आँखों में अब डर नहीं, आत्मविश्वास है।
कॉन्फ्रेंस टेबल पर बैठे सभी लोगों के चेहरे पर अलग-अलग भाव हैं। महिला जो पहले हावी लग रही थी, अब थोड़ी असमंजस में है। यह जो शांति है ना, यह तूफान से पहले की शांति लग रही है। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना के इस एपिसोड में डायलॉग से ज्यादा एक्टिंग बोल रही है। हर किसी की चुप्पी में एक कहानी छिपी है।
शुरुआत में जो कागजात उसे मजबूर कर रहे थे, वही कागजात अब उसकी ताकत बन गए हैं। यह बदलाव बहुत ही बारीकी से दिखाया गया है। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना में ऐसे सीन्स देखकर लगता है कि लेखक ने बहुत मेहनत की है। उस व्यक्ति के हाथों में पेन और कागज देखकर लगता है कि अब वह फैसले लेने वाला है, न कि लेने वाला।
डायलॉग से ज्यादा इसमें नजरों का खेल देखा जा सकता है। जब वह महिला उसे घूरती है और वह शांति से वापस देखता है, तो स्क्रीन पर वोल्टेज बढ़ जाता है। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना के किरदारों की केमिस्ट्री बहुत गजब की है। बिना चीखे-चिल्लाए जो संदेश दिया गया है, वह शानदार है।
तीन दिन बाद का टाइटल कार्ड आते ही समझ गया कि अब खेल बदलने वाला है। शहर का वह ऊंचा टावर और फिर मीटिंग रूम का सीन, सब कुछ नई शुरुआत का संकेत दे रहा है। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना में समय के साथ किरदारों का विकास देखना बहुत रोमांचक है। अब वह व्यक्ति माफी नहीं मांगेगा, बल्कि हुकूमत करेगा।