जब उसने महिला का गला पकड़ा, तो स्क्रीन के सामने बैठे हर किसी का दिल जोर से धड़का। यह हिंसा क्यों? क्या यह बदला है या पागलपन? दीवार पर लिखा 'मानवता' का नारा इस क्रूरता के सामने बेमानी लग रहा है। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना शो में ऐसे मोड़ आते हैं जो रात भर नींद उड़ा दें। कपड़े साफ करने का वह एक्शन और फिर गुस्से में चिल्लाना, सब कुछ बहुत ही तीव्र और असली लगता है।
नीली-सफेद पट्टी वाली वर्दी पहने वह महिला कितनी असहाय लग रही है। उसके चेहरे पर डर और आंसू साफ दिख रहे हैं। सामने खड़ा व्यक्ति इतना शांत कैसे रह सकता है जब वह चिल्ला रही हो? यह पावर डायनामिक बहुत डरावना है। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना की कहानी में ऐसे सीन आते हैं जो इंसानियत पर सवाल उठाते हैं। कमरे की खामोशी और उसकी चीखों का कंट्रास्ट देखकर रूह कांप जाती है।
पीछे खड़े डॉक्टर और नर्स बस तमाशबीन बने हुए हैं। क्या वे डरे हुए हैं या इस साजिश का हिस्सा? यह सवाल दिमाग में बार-बार आता है। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना में हर किरदार की चुप्पी एक बड़ा राज छिपाए हुए है। मुख्य किरदार का व्यवहार इतना अहंकारी है कि उसे देखकर गुस्सा आता है। वह क्लिपबोर्ड लेता है और आदेश देता है, जैसे वह अस्पताल का मालिक हो, न कि कोई मरीज या रिश्तेदार।
उस व्यक्ति के चेहरे के भाव देखते ही बनते हैं। कभी शांत, कभी गुस्से से लाल, और कभी व्यंग्य करते हुए मुस्कुराता हुआ। यह पागलपन है या कोई गहरी चोट? मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना ड्रामा में ऐसे किरदार होते हैं जिन्हें समझना नामुमकिन लगता है। उसने रूमाल से हाथ साफ किए और फिर हमला कर दिया, यह एक्शन बहुत ही सिनेमैटिक और डरावना था। हर फ्रेम में एक नया झटका मिलता है।
रस्सियों से बंधे हाथ और पैर देखकर लगता है कि यह कोई अस्पताल नहीं, बल्कि जेल है। महिला की हालत देखकर दिल पसीज जाता है। वह कुछ बोलना चाहती है पर डर के मारे रुक जाती है। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना की यह कहानी हमें बताती है कि कभी-कभी सबसे सुरक्षित जगहें भी खतरनाक हो सकती हैं। नीली चादर और सफेद दीवारें अब डरावनी लगने लगी हैं। यह दृश्य बहुत ही तीव्र भावनाओं से भरा है।