लॉकर रूम का वो सीन जहां लू मिंग डॉक्टर की कॉलर पकड़ लेता है वहां का तनाव महसूस किया जा सकता है। चोट का डर और हार का गुस्सा दोनों ही चेहरे पर साफ दिख रहे थे। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के इस ड्रामे ने दिल जीत लिया। एनिमेशन इतना रियल लगा कि सांस रुक गई।
स्कोरबोर्ड पर ० २ देखकर लू मिंग की आंखों से आंसू टपकना बहुत इमोशनल था। स्टैडियम में सन्नाटा और फिर लॉकर रूम में फूट फूट कर रोना। पंचदीपा की फुटबॉल टीम ने दिखाया कि हारना कितना भारी पड़ सकता है। ये सीन देखकर मेरी भी आंखें नम हो गईं।
पीली जर्सी वाले खिलाड़ियों की स्पीड और स्किल देखकर हैरानी हुई। खासकर नंबर १० का गोल तो कमाल का था। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के विरोधी इतने ताकतवर हैं कि हर पल चुनौती लगती है। मैदान का माहौल और भीड़ का शोर सब कुछ परफेक्ट था।
एड़ी की हड्डी में चोट का एक्स रे देखकर ही दर्द महसूस होने लगा। लू मिंग का दर्द से कराहना और फिर भी खेलना चाहना दिखाता है कि वो कितना समर्पित है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम की ये कहानी हर खिलाड़ी के संघर्ष को दर्शाती है। मेडिकल डिटेल बहुत सटीक थी।
सूट पहने कोच का सिर पकड़कर बैठना और पसीने से तर बतर होना दिखाता है कि टीम पर कितना दबाव है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम की हार सिर्फ खिलाड़ियों की नहीं पूरी टीम की जिम्मेदारी है। ये सीन रियलिस्टिक लगा और कोच की चिंता साफ झलकी।