जब वो घायल साथी के पास दौड़ा और उसे संभाला, तो लगा जैसे मैदान में कोई भाई नहीं, कोई योद्धा खड़ा हो। पंचदीपा की फुटबॉल टीम का कप्तान सिर्फ लीड नहीं करता, बल्कि दर्द बाँटता है। उसकी आँखों में आग और चेहरे पर दृढ़ता देखकर लगता है कि वो अगले पल कुछ चमत्कार करने वाला है। ऐसे लीडर के लिए कोई भी मरेगा!
लाल झंडे लहराते हुए पूरा स्टेडियम एक सुर में चिल्ला रहा था। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के लिए ये सिर्फ मैच नहीं, जंग थी। हर चेहरे पर जोश, हर हाथ में झंडा, हर आवाज़ में वफादारी। ऐसे माहौल में खेलना आसान नहीं, लेकिन जब पूरा शहर पीछे खड़ा हो, तो हारना नामुमकिन हो जाता है।
नीली जर्सी वाला खिलाड़ी जब सिर पकड़कर बैठ गया, तो लगा जैसे उसकी भी कहानी है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों के सामने वो टूट गया, लेकिन उसकी आँखों में हार नहीं, अगली लड़ाई की तैयारी दिखी। फुटबॉल सिर्फ गोल नहीं, इमोशन का खेल है।
दर्द से तड़पते हुए भी जब वो मुस्कुराया और अपने साथी का हाथ थामा, तो लगा जैसे पंचदीपा की फुटबॉल टीम की जीत उसी पल तय हो गई। उसकी आँखों में आँसू थे, लेकिन होठों पर विजय की मुस्कान। ऐसे पल सिर्फ फिल्में नहीं, असली जिंदगी में भी होते हैं।
जब वो गेंद को हाथ में लेकर खड़ा हुआ, तो लगा जैसे वो सब कुछ सोच चुका है। पंचदीपा की फुटबॉल टीम के खिलाड़ियों के लिए वो चुनौती था, लेकिन उसकी आँखों में शांति थी। फिर अचानक उसने गेंद फेंकी और सब कुछ बदल गया। शांत पानी में ही गहराई होती है।