जब अमीर भाई ने उस साधारण लड़के को धक्का दिया और अपना रुतबा दिखाया, तो समझ आ गया कि यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं, बल्कि वर्ग अंतर की है। लड़की के चेहरे पर उलझन और डर साफ झलक रहा था। ठुकराकर पछताएगा सीन के लिए यह व्यवस्था बिल्कुल सही है। भोजन मेज पर तनाव और खामोशी ने माहौल को और भी नाटकीय बना दिया।
माँ का रोना और बेटी को गले लगाना दिल को छू लेने वाला था। सालों बाद मिलने का दर्द और खुशी दोनों उनके चेहरे पर साफ थे। लेकिन जैसे ही अमीर भाई ने दखल दिया, सब बदल गया। ठुकराकर पछताएगा की कहानी में यह भावनात्मक पहलू बहुत जरूरी है। लड़की अब दो रास्तों के बीच फंस गई है - एक तरफ प्यार, दूसरी तरफ परिवार की जिम्मेदारी।
भाई का व्यवहार साफ बता रहा है कि वह अपनी बहन को किसी साधारण लड़के के साथ नहीं देख सकता। उसने हवाई अड्डे पर ही अपनी शक्ति दिखा दी। ठुकराकर पछताएगा वाले कथानक में यह किरदार खलनायक जैसा लग रहा है। भोजन के दौरान उसकी चुप्पी और घूरना बता रहा था कि वह कुछ बड़ी योजना बना रहा है। अमीर परिवार का अहंकार कभी-कभी रिश्ते तोड़ देता है।
लड़की के चेहरे पर जो डर और उलझन था, वह शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। एक तरफ अपना प्यार, दूसरी तरफ अमीर परिवार का दबाव। ठुकराकर पछताएगा की कहानी में यह किरदार सबसे ज्यादा प्रभावित होगा। भोजन मेज पर उसकी खामोशी सब कुछ कह रही थी। वह न तो मना कर पा रही थी, न ही हां कह पा रही थी। यह दुविधा दर्शकों को बांधे रखेगी।
खाने की मेज पर बैठकर भी कोई बात नहीं कर रहा था। सिर्फ कांटों की आवाज और ग्लास टकराने की आवाज आ रही थी। यह मौन सबसे ज्यादा शोर मचा रहा था। ठुकराकर पछताएगा वाले सीन के लिए यह बिल्कुल सही व्यवस्था है। बाप का गुस्सा, माँ की चिंता, भाई का अहंकार और लड़की का डर - सब कुछ इस एक सीन में समेट दिया गया है।