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ठुकराकर पछताएगावां29एपिसोड

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ठुकराकर पछताएगा

गौरी तीन साल से अर्जुन का पीछा कर रही थी। 1081वीं बार ठुकराने पर उसने कहा – बस। असल में वह दिल्ली की सबसे बड़ी अमीर घराने की बेटी थी। बचपन के दोस्त आदित्य से शर्त लगाई थी – गरीब बनकर अर्जुन को फँसाना। शर्त खत्म, गौरी असली अवतार में लौटी। अर्जुन को सच पता चला तो वह टूट गया। तनु के साथ मिलकर गौरी-आदित्य की शादी में तोड़फोड़ की कोशिश की, लेकिन उल्टा उसका ही सबकुछ बर्बाद हो गया। अनुवादित टमाटर लघु कहानी 'जब चाटने वाला नहीं बना, तो स्कूल का हैंडसम लड़का पछताने लगा', लेखक: 【नान ज़ियाओ फ़ेई】
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इस एपिसोड की समीक्षा

मेनू देखकर बदला माहौल

जैसे ही सफेद कार्डिगन वाली लड़की ने मेनू खोला, कमरे का माहौल पूरी तरह बदल गया। ग्रे सूट वाली लड़की का इशारा करना और बाकी दोस्तों की चुप्पी सब कुछ कह रही है। लगता है कि कीमतों को देखकर उसे एहसास हो गया कि वह इस महंगे रेस्तरां के लिए तैयार नहीं थी। यह ठुकराकर पछताएगा वाला पल है जब इंसान अपनी औकात से बाहर निकलने की कोशिश करता है।

दोस्तों का क्रूर मजाक

इस वीडियो में दोस्तों के बीच की कड़वी सच्चाई दिखाई गई है। सफेद कार्डिगन वाली लड़की को जानबूझकर उस स्थिति में लाया गया जहां उसे शर्मिंदा होना पड़े। ग्रे सूट वाली लड़की का व्यवहार सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। यह ठुकराकर पछताएगा जैसी स्थिति है जहां रिश्तों की असली परीक्षा हो रही है। क्या दोस्ती पैसे से बड़ी है या फिर यहीं सब खत्म हो जाएगा?

वेटर की भूमिका और तनाव

वेटर का व्यवहार इस पूरे ड्रामे में बहुत अहम है। वह जानबूझकर सफेद कार्डिगन वाली लड़की को मेनू देकर उस स्थिति में डालता है। उसकी मुस्कान के पीछे छिपा व्यंग्य साफ दिख रहा है। यह ठुकराकर पछताएगा वाला सीन है जहां सर्विस स्टाफ भी इस मानसिक यातना में शामिल हो जाता है। लक्जरी रेस्तरां का माहौल और भी दमघोंटू लग रहा है।

आंखों से कही गई कहानी

सफेद कार्डिगन वाली लड़की की आंखों में जो दर्द है वह शब्दों से कहीं ज्यादा गहरा है। जब वह मेनू के पन्ने पलटती है तो उसका चेहरा पीला पड़ जाता है। ग्रे सूट वाली लड़की की नजरें उसे जज कर रही हैं। यह ठुकराकर पछताएगा जैसा एहसास है जब इंसान को अपनी गलती का अहसास होता है। बिना डायलॉग के ही पूरी कहानी कह दी गई है।

लक्जरी का दबाव

इस रेस्तरां का लक्जरी माहौल सफेद कार्डिगन वाली लड़की के लिए जाल साबित हो रहा है। गोल्डन छत और महंगी सजावट के बीच वह असहज महसूस कर रही है। जब मेनू में कीमतें देखती है तो उसकी सांसें रुक सी जाती हैं। यह ठुकराकर पछताएगा वाला पल है जब दिखावे की दुनिया असली चेहरा दिखाती है। दोस्तों का साथ भी अब बोझ लग रहा है।

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