सफेद फर कोट वाली औरत का एटीट्यूड देखकर गुस्सा आता है। वो माँ को धक्का देती है और अपनी नाक सिकोड़ती है। लगता है उसे अपनी अमीरी पर बहुत घमंड है। जीवन भर का साथ में विलेन कैरेक्टर की एंट्री धमाकेदार हुई है। अब देखना है ये गरीब माँ इस सबका कैसे सामना करती है।
माँ के सामने खड़ा होकर चिल्लाना किसी बेटे को शोभा नहीं देता। उसकी आँखों में गुस्सा है लेकिन माँ की आँखों में बेबसी। जीवन भर का साथ की कहानी में ये किरदार बहुत नेगेटिव लग रहा है। उम्मीद है आगे चलकर उसे अपनी गलती का अहसास होगा और वो माँ के पास लौटेगा।
शानदार लॉबी में गरीब कपड़ों वाली माँ बिल्कुल अलग लग रही थी। चारों तरफ अमीरी थी लेकिन उस माँ के चेहरे पर फकीरी और दुख था। जीवन भर का साथ ने सेट डिजाइन और किरदारों के कपड़ों से ही कहानी बता दी। विजुअल स्टोरीटेलिंग बहुत शानदार है इस शो में।
माँ के चेहरे के एक्सप्रेशन देखकर लगता है जैसे एक्ट्रेस सच में रो रही हो। हर झुर्री में दर्द साफ दिख रहा था। जीवन भर का साथ में एक्टिंग इतनी नेचुरल है कि हम भी उनके साथ रो पड़ते हैं। डायरेक्टर ने क्लोजअप शॉट्स का बहुत अच्छा इस्तेमाल किया है इमोशन दिखाने के लिए।
पहले सीन में ही कार की चाबी और सूट बूट दिखाकर मैसेज दे दिया गया कि यहाँ पैसा ही सब कुछ है। लेकिन जब माँ आती है तो पता चलता है कि इंसानियत पैसों से बड़ी होती है। जीवन भर का साथ में ये थीम बहुत स्ट्रॉन्गली पेश की गई है। अमीरी और गरीबी का ये टकराव देखने लायक है।