जब गीता टूट रही थी, तब उसके पति ने कंधे पर हाथ रखकर उसे संभाला। रिश्तों में झगड़े होते हैं, पर मुसीबत के वक्त साथ खड़ा होना ही असली प्यार है। जीवन भर का साथ निभाने का मतलब यही तो है। उस आदमी की चुप्पी में भी एक ताकत थी जो गीता को सहारा दे रही थी। सच्चा साथी वही है जो आपके आंसू पोंछ दे।
स्ट्रेचर पर लेटा वह नौजवान अपनी माँ को देख रहा था, शायद वह कुछ कहना चाहता था पर आवाज नहीं निकल रही थी। गीता का दर्द देखकर लगता है जैसे वह अपनी सांसें भी रोक ले। जीवन भर का साथ शायद यहीं खत्म हो रहा हो, पर माँ-बेटे का बंधन कभी नहीं टूटता। उसकी आंखों में माफ़ी और डर दोनों साफ़ दिख रहे थे।
व्हाइट कोट पहने डॉक्टर ने जब फॉर्म थमाया, तो कमरे का माहौल और भी गंभीर हो गया। गीता ने हिचकिचाहट के बाद साइन किया, यह पल किसी ड्रामे से कम नहीं था। जीवन भर का साथ निभाने का वादा शायद अब परीक्षा में है। मेडिकल इमरजेंसी में फैसले लेना कितना मुश्किल होता है, यह सीन देखकर समझ आया।
गीता की आंखों से गिरते आंसू शब्दों से ज्यादा बयां कर रहे थे। जब बेटा खतरे में हो तो एक माँ क्या महसूस करती है, यह सीन देखकर रूह कांप गई। जीवन भर का साथ निभाने का मतलब यही तो है कि आप अपने प्रियजन के लिए कुछ भी कर गुजरें। उसका दर्द देखकर कोई भी इंसान रो पड़े।
सफेद दीवारें, नीली पोस्टर और स्ट्रेचर पर लेटा घायल इंसान - यह सीन किसी थ्रिलर से कम नहीं लग रहा था। गीता और उसके पति की चिंता साफ़ झलक रही थी। जीवन भर का साथ निभाने का वादा शायद इसी मोड़ पर आकर टूट गया हो। अस्पताल की ठंडक और इंसानों के गर्म जज़्बात का कॉन्ट्रास्ट कमाल का था।