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जीवन भर का साथवां3एपिसोड

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जीवन भर का साथ

गीता, एक गाँव की सफाई कर्मचारी, को अचानक करोड़ों की लॉटरी लगी। खुश होकर वह अपने बेटे रजत को पैसे देने शहर पहुँची। लेकिन बहू और उसकी माँ ने उसे अपमानित किया। बेटे ने भी उसे ठुकरा दिया और रिश्ता तोड़ दिया। बाद में जब उन्हें पता चला कि गीता ने करोड़ों की लॉटरी जीती थी, तब सबको अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गीता की जिंदगी अब बदल चुकी थी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

अमीर बाप का बेटा और गरीब मां का प्यार

वीडियो की शुरुआत में एक अमीर आदमी तकलीफ में है, लेकिन उसे बचाने वाली महिला साधारण कपड़ों में है। बाद में पता चलता है कि वह उसकी मां हो सकती है जो अपने बेटे को बचाने आई है। जब महंगी कार आती है और नौकर भागते हुए आते हैं, तो क्लास डिफरेंस साफ दिखता है। जीवन भर का साथ में ऐसे ही इमोशनल मोड़ होते हैं जो दिल को छू लेते हैं। मां का प्यार सबसे बड़ा होता है।

सेल्समैन का घमंड और ग्राहक की असली पहचान

जब वह महिला बड़े बैग लेकर सेल्स ऑफिस पहुंची, तो सेल्समैन ने उसे नजरअंदाज किया। उसे लगा कि यह कोई साधारण औरत है जो विला नहीं खरीद सकती। लेकिन जब उसने फॉर्म साइन किया और पेमेंट की बात की, तो सेल्समैन का चेहरा बदल गया। जीवन भर का साथ जैसी स्टोरी में यही तो मजा है कि कभी किसी को उसके कपड़ों से नहीं आंकना चाहिए। असली अमीरी दिल की होती है।

लग्जरी विला और साधारण औरत का कॉन्ट्रास्ट

ऑफिस के अंदर का माहौल बहुत लग्जरी है, चमकदार फर्श और महंगे पोस्टर। वहीं दूसरी तरफ वह महिला साधारण कपड़ों में बड़े थैले लेकर खड़ी है। सेल्समैन शुरू में उसे इग्नोर करता है, लेकिन बाद में जब सच्चाई सामने आती है तो हैरान रह जाता है। जीवन भर का साथ में ऐसे सीन बहुत प्रभावशाली लगते हैं। यह दिखाता है कि पैसा इंसान को अंधा बना देता है, लेकिन सच्चाई हमेशा सामने आती है।

मां का त्याग और बेटे की गलतफहमी

पहले लगता है कि वह आदमी अजनबी है, लेकिन जब वह महिला उसे दवाई देती है और फिर ऑफिस जाती है, तो लगता है कि यह कोई गहरा रिश्ता है। शायद बेटा अपनी मां को पहचान नहीं पा रहा या शर्मिंदा है। जीवन भर का साथ जैसी कहानियों में परिवार के रिश्तों को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। मां हमेशा बच्चों के लिए सब कुछ छोड़ देती है, चाहे बच्चे कितने भी बड़े क्यों न हो जाएं।

सेल्समैन का अहंकार टूटा

सेल्समैन शुरू में बहुत घमंडी लग रहा था, उसने महिला की बात नहीं सुनी और ब्रोशर पढ़ता रहा। लेकिन जब महिला ने साइन किया और पेमेंट की तैयारी की, तो उसका अहंकार चूर-चूर हो गया। वह तुरंत बदल गया और दूसरे कर्मचारी को बुलाया। जीवन भर का साथ में ऐसे किरदार बहुत रियल लगते हैं। अक्सर लोग बाहरी दिखावे से प्रभावित होते हैं, लेकिन असली कद्र तो इंसानियत की होती है।

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