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जीवन भर का साथवां2एपिसोड

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जीवन भर का साथ

गीता, एक गाँव की सफाई कर्मचारी, को अचानक करोड़ों की लॉटरी लगी। खुश होकर वह अपने बेटे रजत को पैसे देने शहर पहुँची। लेकिन बहू और उसकी माँ ने उसे अपमानित किया। बेटे ने भी उसे ठुकरा दिया और रिश्ता तोड़ दिया। बाद में जब उन्हें पता चला कि गीता ने करोड़ों की लॉटरी जीती थी, तब सबको अपनी गलती का एहसास हुआ। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। गीता की जिंदगी अब बदल चुकी थी।
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इस एपिसोड की समीक्षा

माँ का संघर्ष और समाज की बेरुखी

माँ सड़क पर थैले लेकर चल रही है और लोग बस देखते रह जाते हैं। कोई मदद नहीं करता, कोई पूछता नहीं। जीवन भर का साथ निभाने वाली माँ को इस तरह अकेला छोड़ देना कितना क्रूर है। यह दृश्य समाज की बेरुखी को बहुत अच्छे से दिखाता है और दिल को झकझोर देता है।

बहू का घमंड और माँ की मजबूरी

बहू का अहंकार देखकर गुस्सा आता है, लेकिन माँ की मजबूरी देखकर दिल रोता है। वह अपने घर से निकाली जा रही है और बहू बस खड़ी होकर देख रही है। जीवन भर का साथ निभाने वाले रिश्ते में इतनी दरारें कैसे आ गईं, यह समझ नहीं आता। नेटशॉर्ट पर ऐसे ड्रामेटिक सीन्स देखना हमेशा इमोशनल होता है।

सास का क्रूर व्यवहार

सास का व्यवहार देखकर लगता है कि वह माँ को जानबूझकर तंग कर रही है। माँ बेचारी कुछ बोल नहीं पा रही है और सास बस उसे नीचा दिखा रही है। जीवन भर का साथ निभाने वाले रिश्ते में इतनी कड़वाहट कैसे आ गई, यह दृश्य बहुत गहराई से दिखाता है।

बेटे की असहायता

बेटा अपनी माँ को जाते हुए देख रहा है, लेकिन कुछ कर नहीं सकता। उसकी आँखों में आँसू हैं, लेकिन वह बस खड़ा रह जाता है। जीवन भर का साथ निभाने का वादा टूट रहा है और वह बस मूक दर्शक बना हुआ है। यह सीन देखकर लगता है कि कभी-कभी मजबूरी सबसे बड़ा दर्द होती है।

माँ का त्याग और बेटे की बेवफाई

माँ ने अपने बेटे के लिए सब कुछ त्याग दिया, लेकिन बेटा उसे इस तरह अकेला छोड़ देता है। जीवन भर का साथ निभाने का वादा टूट रहा है और माँ बस अपने थैले लेकर जा रही है। यह दृश्य देखकर लगता है कि कभी-कभी त्याग भी बेकार चला जाता है।

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