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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कनवां64एपिसोड

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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन

पुरातात्विक संरक्षिका चंद्रिका एक उपन्यास में फँसकर रोशनी राजकुमारी की जगह ले लेती है। कहानी के अनुसार तीन दिन बाद ज़ालिम शासक रुद्रप्रताप उसे मार डालेगा। जान बचाने के लिए वह उससे उलझती है, हर जाल को चतुराई से नाकाम करती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच कशिश बढ़ती है। चंद्रिका रुद्रप्रताप के बचपन के घावों को भरती है और उसके अकेले दिल को गर्माहट देती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

रात की खामोशी में प्यार का इज़हार

इस दृश्य में भावनाओं की गहराई देखकर दिल दहल गया। जब वह उसके माथे को पोंछती है और फिर हाथ थाम लेती है, तो लगता है जैसे चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन ने सचमुच जादू कर दिया हो। कमरे की रोशनी और उनके बीच की खामोशी हर पल को और भी खास बना रही थी। आँखों में छुपा दर्द और मुस्कान में छुपा प्यार—सब कुछ इतना सच्चा लगा कि बस देखते रहने का मन किया। नेटशॉर्ट पर ऐसे दृश्य देखना एक अलग ही अनुभव है।