इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक जाती है। रानी का ठंडा चेहरा और घुटनों पर बैठी लड़की की बेबसी देखकर दिल दहल गया। चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन जैसे शब्द इस माहौल पर सटीक बैठते हैं। जब रक्षक उसे पकड़ते हैं और वह चीखती है, तो लगता है जैसे न्याय की उम्मीद टूट गई हो। आखिर में आए युवक की नज़र में गुस्सा और चिंता दोनों साफ़ दिख रहे हैं। क्या वह बचाएगा उसे? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना एक अलग ही अनुभव है।