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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कनवां41एपिसोड

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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन

पुरातात्विक संरक्षिका चंद्रिका एक उपन्यास में फँसकर रोशनी राजकुमारी की जगह ले लेती है। कहानी के अनुसार तीन दिन बाद ज़ालिम शासक रुद्रप्रताप उसे मार डालेगा। जान बचाने के लिए वह उससे उलझती है, हर जाल को चतुराई से नाकाम करती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच कशिश बढ़ती है। चंद्रिका रुद्रप्रताप के बचपन के घावों को भरती है और उसके अकेले दिल को गर्माहट देती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

सत्ता के खेल में दिल की धड़कन

इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक जाती है। रानी का ठंडा चेहरा और घुटनों पर बैठी लड़की की बेबसी देखकर दिल दहल गया। चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन जैसे शब्द इस माहौल पर सटीक बैठते हैं। जब रक्षक उसे पकड़ते हैं और वह चीखती है, तो लगता है जैसे न्याय की उम्मीद टूट गई हो। आखिर में आए युवक की नज़र में गुस्सा और चिंता दोनों साफ़ दिख रहे हैं। क्या वह बचाएगा उसे? यह सवाल दिमाग में घूम रहा है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामे देखना एक अलग ही अनुभव है।