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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां1एपिसोड

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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
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इस एपिसोड की समीक्षा

छोटी बच्ची का सिस्टम मिशन

आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में छोटी लड़की का चेहरा देखकर दिल दहल गया। जब उसे पता चला कि दो दिन बाद आपदा आएगी और उसे हज़ार सिल्वर मिले हैं, तो उसकी आँखों में डर और जिम्मेदारी दोनों झलक रहे थे। दादी माँ से बात करते समय उसकी मासूमियत और गंभीरता का मिश्रण देखकर लगा कि यह बच्ची असल में किसी बड़ी जिम्मेदारी को संभालने वाली है। रसोई में जाकर बर्तन ढूंढते समय उसकी चिंता साफ दिख रही थी।

छोटी बच्ची का बड़ा साहस

आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में छोटी लड़की का चेहरा देखकर दिल दहल गया। जब उसे पता चला कि दो दिन बाद मुसीबत आएगी, तो उसने तुरंत योजना बनानी शुरू कर दी। दादी माँ से बात करते समय उसकी आँखों में डर था, पर हिम्मत भी। रसोई में जाकर उसने छुपाकर सामान इकट्ठा किया, जैसे कोई छोटी योद्धा हो। भाई और परिवार वाले हैरान थे, पर वह चुपचाप तैयारी कर रही थी। नेटशॉर्ट ऐप पर यह दृश्य देखते समय लगा कि बच्चे भी बड़े फैसले ले सकते हैं। उसकी मासूमियत और समझदारी का मेल देखकर मन भर आया।