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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राहवां17एपिसोड

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आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह

अंजलि एक प्राचीन आपदा प्रणाली में जाकर एक पाँच साल की बालिका के शरीर में समा जाती है। उसका कार्य है—टिड्डी दल, शीत लहर, महामारी, अकाल जैसी भीषण आपदाओं से अपने परिवार को बचाना। अंत तक जीवित रहने पर वह असली दुनिया में लौट सकती है और सौ अरब जीत सकती है। रास्ते में उसे लोगों के अविश्वास, विरोध और आपदाओं से पैदा मानवीय संकटों का भी सामना करना पड़ता है। अंततः अपनी बुद्धि और सिस्टम के इनामों से वह पूरे गाँव को बचाकर नेता बन जाती है। जब लौटने का समय आता है, तो सिस्टम में
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इस एपिसोड की समीक्षा

सत्ता और भय का खेल

इस दृश्य में तनाव इतना गहरा है कि सांस रुक जाती है। एक तरफ अहंकारी अधिकारी का घमंड और दूसरी तरफ मजबूर पिता की पीड़ा। जब तलवार गले पर रखी जाती है, तो लगता है जैसे समय थम गया हो। बच्ची की मासूमियत और उसकी आंखों में छिपा डर दिल को चीर जाता है। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह जैसे शब्द इस स्थिति पर सटीक बैठते हैं। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है कि कहानी कितनी गहरी है। हर चेहरे पर एक अलग कहानी लिखी है।

दृश्य बदलते ही दिल दहल गया

शुरुआत में हंसी-मजाक का माहौल था, लेकिन जैसे ही रात का दृश्य आया, सब कुछ बदल गया। तलवार की नोक पर कांपता चेहरा और बंधी हुई मां-बेटी को देखकर रोंगटे खड़े हो गए। आपदाएँ बरसीं, सिस्टम से पाई राह में ऐसा ट्विस्ट उम्मीद से परे था। आग के सामने बैठे परिवार की चुप्पी में जो दर्द छिपा था, वह शब्दों से बयां नहीं होता। बच्ची की मासूमियत और बुजुर्ग की बेबसी ने दिल तोड़ दिया। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे ड्रामा देखना एक अलग ही अनुभव है, जहां हर फ्रेम में नया झटका मिलता है।