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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कनवां46एपिसोड

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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन

पुरातात्विक संरक्षिका चंद्रिका एक उपन्यास में फँसकर रोशनी राजकुमारी की जगह ले लेती है। कहानी के अनुसार तीन दिन बाद ज़ालिम शासक रुद्रप्रताप उसे मार डालेगा। जान बचाने के लिए वह उससे उलझती है, हर जाल को चतुराई से नाकाम करती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच कशिश बढ़ती है। चंद्रिका रुद्रप्रताप के बचपन के घावों को भरती है और उसके अकेले दिल को गर्माहट देती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

राजकुमार की नज़रों में छुपा दर्द

इस दृश्य में राजकुमार और राजकुमारी के बीच की खामोशी सबसे ज़्यादा बोलती है। जब वह उसके होंठों को छूता है, तो लगता है जैसे वह किसी टूटे हुए वादे को जोड़ने की कोशिश कर रहा हो। चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन की कहानी में यह पल सबसे नाज़ुक है, जहाँ नफ़रत और मोहब्बत की लकीरें मिटती दिखती हैं। मोमबत्तियों की रोशनी में उनका संवाद बिना शब्दों के भी दिल को छू लेता है। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे सीन देखकर लगता है कि कहानी अभी बहुत आगे जाने वाली है।