ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर में वो सीन जब लड़की वैन खोलती है और अंदर सिर्फ अंडे ही अंडे होते हैं, मेरा दिमाग घूम गया! इतनी सादगी से इतना बड़ा ट्विस्ट कोई नहीं दे सकता। मेकर्स ने साबित कर दिया कि कहानी बड़ी होनी चाहिए, बजट नहीं। वो शख्स जो उसे डांट रहा था, उसका चेहरा देखने लायक था।
ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर की हीरोइन ने दिखा दिया कि असली पावर क्या होती है। कागज का टुकड़ा गिरा, सबने मजाक उड़ाया, पर अंत में वही कागज सबकी बोलती बंद कर गया। उसकी आंखों में जो चमक थी जब उसने वैन दिखाई, वो किसी रेसर से कम नहीं थी। ऐसे किरदार हमें और चाहिए।
ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर में सूट वाले बॉस का गुस्सा देखकर डर लग रहा था। पर जब उसे पता चला कि लड़की ने क्या किया, तो उसका रिएक्शन कमाल का था। कभी गुस्सा, कभी हैरानी, कभी शर्मिंदगी। एक्टर ने बहुत अच्छा अभिनय किया। ऐसे विलेन जो बाद में सॉफ्ट हो जाएं, सबसे अच्छे लगते हैं।
कौन सोच सकता था कि एक पुरानी जंग लगी वैन रेसिंग ट्रैक पर इतना शोर मचाएगी? ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर का ये सीन जब वैन धूल उड़ाते हुए आती है, तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लड़की ने दिखा दिया कि गाड़ी नहीं, ड्राइवर मायने रखता है। वो पल जब वैन रुकी और सब शांत हो गए, बस तालियां बजनी चाहिए थीं।
ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर में जब पूरी टीम हंस रही थी और फिर अचानक सबकी हंसी रुक गई, वो मोमेंट यादगार है। इंसान को कभी किसी को कम नहीं आंकना चाहिए। उस लड़की ने चुपचाप सबको सबक सिखा दिया। वो शख्स जो सबसे ज्यादा हंसा था, बाद में सबसे ज्यादा शर्मिंदा हुआ। ऐसे ट्विस्ट्स कहानी को जिंदा रखते हैं।
ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर में अस्पताल का सीन बहुत इमोशनल था। वो लड़का जिसके सिर पर पट्टी थी, शायद एक्सीडेंट का शिकार हुआ था। शायद इसी वजह से लड़की इतनी सीरियस थी। जब पीछे की कहानी पता चलती है, तो हर एक्शन का मतलब समझ आता है। ये डायरेक्टर की ताकत है कि वो बिना डायलॉग के सब बता देता है।
ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर में जब बॉस ने टेबलेट पर ग्रेड देखा और हैरान रह गया, वो पल बहुत अच्छा था। डी ग्रेड देखकर उसका चेहरा उतर गया। पर असली ग्रेड तो वो था जो लड़की ने अपने काम से कमाया। कागज पर लिखा ग्रेड नहीं, इंसान का हुनर मायने रखता है। ये मैसेज बहुत प्यारा लगा।
ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर की शूटिंग लोकेशन बहुत शानदार थी। स्टर्लिंग बिल्डिंग के बाहर का सीन जब बॉस गाड़ी से उतरा, तो लगा कोई बड़ी मूवी देख रहे हैं। इतनी ग्रैंड सेटिंग में एक साधारण लड़की का आना और सबको चौंकाना, ये कॉन्ट्रास्ट बहुत अच्छा लगा। विजुअल्स पर कोई समझौता नहीं किया गया।
ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर में वो शख्स बार-बार अपनी घड़ी देख रहा था, जैसे उसे जल्दी हो। पर अंत में पता चला कि वो खुद टाइम का खेल खेल रहा था। जब लड़की ने अपनी घड़ी दिखाई और सब समझ गए, तो मजा आ गया। छोटे-छोटे डीटेल्स पर इतना ध्यान देना, ये ही अच्छी स्टोरीटेलिंग है।
ड्राइविंग स्कूल का एस ड्राइवर के अंत में लड़की की मुस्कान देखकर दिल खुश हो गया। इतनी मेहनत के बाद जब इंसान जीतता है, तो वो पल अनमोल होता है। उसने न तो ज्यादा बोला, न शोर मचाया, बस काम से सबको जवाब दे दिया। ऐसे किरदार हमेशा याद रहते हैं। नेटशॉर्ट पर ऐसे कंटेंट मिलना सुकून देता है।
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