जब बूढ़े साधु ने गो के पत्थर फेंके, तो मुझे लगा जैसे किसी बड़े रहस्य का पर्दाफाश हो रहा हो। छिपा हुआ तानाशाह २ में ऐसे दृश्य दर्शकों को बांधे रखते हैं। जंजीरों में जकड़ा वह पात्र अपनी आँखों से इतनी कहानी कह जाता है कि शब्द बेकार लगते हैं। गुफा का माहौल और मोमबत्तियों की रोशनी ने डर और रहस्य का बेहतरीन मिश्रण बनाया है।
सफेद पोशाक वाला युवक जब कब्र के सामने खड़ा था, तो उसकी आँखों में जो दर्द था, वह सीधे दिल में उतर गया। छिपा हुआ तानाशाह २ के इस सीन में भावनाओं की गहराई कमाल की है। लाल फूलों के बीच खड़ी वह लड़की और उसकी चुप्पी, सब कुछ कह रही थी। प्रकृति के बीच यह दुखद दृश्य बहुत प्रभावशाली लगा।
वह बूढ़ा साधु जब जोर-जोर से हंसता है, तो लगता है जैसे वह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा हो। छिपा हुआ तानाशाह २ में उसके किरदार की परतें बहुत गहरी हैं। जंजीरें उसके शरीर पर हैं, लेकिन उसकी आत्मा आजाद लगती है। उसकी आवाज और हावभाव ने पूरे दृश्य में एक अजीब सी ऊर्जा भर दी है।
काली पोशाक वाली योद्धा जब मुस्कुराती है, तो लगता है जैसे खतरे के बादल छंट गए हों। छिपा हुआ तानाशाह २ में उसके किरदार में एक अलग ही आकर्षण है। उसकी तलवार और उसके तेज दोनों ही धारदार हैं। गुफा के अंधेरे में उसकी मौजूदगी एक उम्मीद की किरण जैसी लगती है।
जब कब्र पर 'प्रिय माँ की स्मृति में' लिखा दिखा, तो आँखें नम हो गईं। छिपा हुआ तानाशाह २ में ऐसे भावनात्मक पल कहानी को गहराई देते हैं। सफेद पोशाक वाले युवक का वह दर्दनाक चेहरा और पीछे खड़ी लड़की की चिंता, सब कुछ बहुत असली लगा। यह दृश्य दिल को छू गया।