इस दृश्य में सफेद पोशाक पहने पात्र की शक्ति इतनी भयानक है कि पूरा कक्ष कांप उठा। उसने बिना किसी हथियार के दुश्मनों को उड़ा दिया, जो छिपा हुआ अत्याचारी दो की सबसे यादगार लड़ाई है। काले कपड़ों वाली लड़की की हार देखकर दिल दहल गया, लेकिन उसकी आंखों में बदले की आग अभी बाकी है।
सफेद घूंघट ओढ़ी नायिका की आंखों में छिपा दर्द सब कुछ कह जाता है। वह खंभे के पीछे छिपकर युद्ध देख रही थी, शायद वह किसी की मदद करना चाहती थी पर मजबूर थी। छिपा हुआ अत्याचारी दो में ऐसे भावनात्मक मोमेंट्स ही कहानी को गहराई देते हैं। उसका चेहरा न दिखना ही उसकी सबसे बड़ी ताकत लगती है।
जब सफेद वस्त्रधारी योद्धा ने अपनी ऊर्जा छोड़ी, तो पर्दे पर नीली रोशनी का ऐसा तूफान आया कि सांस रुक गई। यह दृश्य प्रभाव कमाल के हैं। छिपा हुआ अत्याचारी दो में साहसिक दृश्यों की युद्ध संयोजन बिल्कुल नए स्तर पर है। फर्श पर पड़े हथियार और टूटी हुई कुर्सियां युद्ध की भीषणता बता रही थीं।
काली पोशाक पहनी योद्धा लड़की जब जमीन पर गिरकर खून उगलती है, तो दर्शक के रूप में हम भी दर्द महसूस करते हैं। उसका संघर्ष और हार न मानने का जज्बा छिपा हुआ अत्याचारी दो की असली जान है। वह बार-बार उठने की कोशिश करती है, जो उसकी ताकत को दर्शाता है। यह दृश्य बहुत भावनात्मक है।
जब जादुई हमला हुआ, तो पीछे खड़े लोग जिस तरह से डरकर भागे और छिपे, वह बिल्कुल असली लगता है। उनकी आंखों में खौफ साफ दिख रहा था। छिपा हुआ अत्याचारी दो में भीड़ की प्रतिक्रिया पर भी अच्छा ध्यान दिया गया है। कोई पंखे से छिप रहा था तो कोई खंभे के पीछे, हर किसी का डर अलग तरीके से दिखाया गया।