उसने उसे गले लगाया, लेकिन आंखों में विश्वास नहीं, संदेह था। क्या यह प्यार है या मजबूरी? जब वह उसके कंधे पर सिर रखकर रोई, तो लगा जैसे दोनों के बीच कोई राज़ दबा हो। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना की यह सीन मुझे रात भर जागने पर मजबूर कर गई। क्या वह उसे बचाने आया था या फिर से तोड़ने? नेटशॉर्ट की कहानियां इतनी गहरी क्यों होती हैं?
उसकी सफेद कमीज़ साफ थी, लेकिन आंखें गंदे राज़ छुपाए हुए थीं। जब उसने पानी का गिलास दिया, तो लगा जैसे वह उसे जहर दे रहा हो। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना में हर वस्तु का मतलब गहरा है। वह क्यों आया? क्यों बैठा? क्यों चुप है? नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखकर लगता है कि हर फ्रेम में कोई सुराग छुपा है। मैं अगले एपिसोड का इंतज़ार नहीं कर पा रही!
दोनों बिस्तर पर बैठे थे, लेकिन बीच में एक अदृश्य दीवार थी। वह उसे छूना चाहता था, लेकिन डर रहा था। वह उसे धक्का देना चाहती थी, लेकिन रो रही थी। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना की यह भावनात्मक टकराव मुझे रुला गया। नेटशॉर्ट की कहानियां इतनी असली क्यों लगती हैं? जैसे हमारे अपने रिश्तों का आईना हो।
जब उसने अपने घाव को छुआ, तो लगा जैसे वह अपने अतीत को फिर से जी रही हो। उसकी आंखों में आंसू नहीं, आग थी। पुरुष ने उसे रोका, लेकिन क्यों? क्या वह उसे बचाना चाहता था या फिर से चोट पहुंचाने से रोकना? मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना में हर एक्शन के पीछे एक कहानी है। नेटशॉर्ट पर ऐसे सीन देखकर लगता है कि मैं खुद उस कमरे में बैठी हूं।
कोई डायलॉग नहीं, कोई शोर नहीं, बस दो आंखें जो एक-दूसरे से बात कर रही थीं। जब वह उसे देखकर चौंकी, तो लगा जैसे उसने कोई भूत देख लिया हो। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना की यह साइलेंट ड्रामा मुझे हैरान कर गया। नेटशॉर्ट की कहानियां इतनी कम शब्दों में इतना कुछ कैसे कह देती हैं? मैं तो बस देखती रह गई।