काले कोट में लिपटा वो शख्स जब स्क्रीन देखता है, तो लगता है जैसे उसकी दुनिया ढह गई हो। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना में ये पल सबसे भारी था। उसने मुट्ठी भींच ली, आँखें फैल गईं, और साँस रुक सी गई। कमरे की खामोशी और उसकी धड़कनों की आवाज़ एक हो गई थी। ऐसा लगा जैसे वो चीखना चाहता हो, पर आवाज़ गले में अटक गई हो। अभिनय इतना सच्चा था कि मैं भी उसकी पीड़ा महसूस करने लगी।
लैपटॉप की स्क्रीन पर जब वो बंधी हुई लड़की दिखाई दी, तो उसकी आँखों में आग लग गई। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना का ये सीन देखकर मेरी भी रूह काँप गई। उसने टेबल पर मुट्ठी मारी, चेहरा विकृत हो गया, और आँखों से आँसू छलक आए। ऐसा लगा जैसे वो उस लड़की को बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरे। उसकी बेबसी और गुस्सा दोनों एक साथ उबल रहे थे। ये दृश्य दिल को छू गया।
वो कुछ नहीं बोला, बस स्क्रीन को घूरता रहा। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना में ये खामोशी सबसे ज़्यादा शोर मचा रही थी। उसकी आँखें नम थीं, चेहरा सफेद पड़ गया था, और हाथ काँप रहे थे। ऐसा लगा जैसे वो अपने आप को कोस रहा हो कि वो वहाँ नहीं था। उसकी चुप्पी में इतना दर्द था कि मैं भी रो पड़ी। अभिनेता ने बिना डायलॉग के इतना कुछ कह दिया कि दिल दहल गया। ये दृश्य यादगार है।
काले कोट में लिपटा वो शख्स जब स्क्रीन देखता है, तो लगता है जैसे उसकी दुनिया ढह गई हो। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना में ये पल सबसे भारी था। उसने मुट्ठी भींच ली, आँखें फैल गईं, और साँस रुक सी गई। कमरे की खामोशी और उसकी धड़कनों की आवाज़ एक हो गई थी। ऐसा लगा जैसे वो चीखना चाहता हो, पर आवाज़ गले में अटक गई हो। अभिनय इतना सच्चा था कि मैं भी उसकी पीड़ा महसूस करने लगी।
लैपटॉप की स्क्रीन पर जब वो बंधी हुई लड़की दिखाई दी, तो उसकी आँखों में आग लग गई। मुझे मत छुओ! अब नहीं लौटना का ये सीन देखकर मेरी भी रूह काँप गई। उसने टेबल पर मुट्ठी मारी, चेहरा विकृत हो गया, और आँखों से आँसू छलक आए। ऐसा लगा जैसे वो उस लड़की को बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरे। उसकी बेबसी और गुस्सा दोनों एक साथ उबल रहे थे। ये दृश्य दिल को छू गया।