वह लड़का अकेले सोफे पर बैठा फोन घूर रहा था, और जब कॉल कनेक्ट नहीं हुआ तो उसने फोन पटक दिया। यह वो पल था जब समझ आया कि वह कितना टूट चुका है। ठुकराकर पछताएगा की कहानी में यह सीन सबसे ज्यादा इमोशनल था। उसकी बेचैनी और गुस्सा साफ झलक रहा था, जैसे वह किसी से माफ़ी मांगना चाहता हो पर कर न पा रहा हो।
बाहर के सीन में वह लड़का लाल स्पोर्ट्स कार के पास खड़ा था, हाथ में लाल गुलाबों का गुच्छा। वह लड़की चश्मे और पोनीटेल में आई, और उसका रिएक्शन देखकर लगा कि शायद वह उसे पहचानती नहीं या जानबूझकर अनजान बन रही है। ठुकराकर पछताएगा का यह पार्ट सबसे ज्यादा ड्रामेटिक था। उसकी उम्मीद और निराशा दोनों एक साथ दिख रही थीं।
गुब्बारे, केक, दोस्तों की हंसी-मज़ाक, सब कुछ परफेक्ट था, पर उन दोनों के बीच की दूरी सब कुछ खराब कर रही थी। जब वह लड़की केक लेकर गई, तो लगा जैसे कोई बड़ा झगड़ा होने वाला है। ठुकराकर पछताएगा की शुरुआत यहीं से हुई। उस लड़के का चुपचाप बैठे रहना और उसकी आँखों में उदासी देखकर दिल भारी हो गया।
जब वह लड़का गुलाब लेकर खड़ा था और वह लड़की बिना कुछ कहे चली गई, तो लगा जैसे कहानी का ट्विस्ट आ गया हो। ठुकराकर पछताएगा का यह सीन सबसे ज्यादा हैरान करने वाला था। शायद उसे कुछ पता चल गया हो, या शायद वह अभी भी गुस्से में है। उस लड़के का चेहरा देखकर लग रहा था कि वह अब हार मान चुका है।
वह लड़का रात के वक्त अकेले सोफे पर बैठा था, फोन हाथ में, और आँखों में उदासी। यह सीन इतना रियल लगा कि लगा जैसे मैं भी वहीं बैठा हूँ। ठुकराकर पछताएगा की कहानी में यह पल सबसे ज्यादा इमोशनल था। उसकी चुप्पी और खाली कमरा सब कुछ कह रहा था कि वह कितना अकेला महसूस कर रहा है।