इतनी भव्य शादी, इतने महंगे गहने, लेकिन दुल्हन की आँखों में एक अजीब सी खालीपन है। वेटर जो सर्विंग कर रहा है, शायद वही उसकी असली कहानी का हिस्सा है। जब वह ठुकराकर पछताएगा, तो यह शादी सिर्फ एक नाटक लगने लगेगी। हर ताली के पीछे एक सिसकी छिपी है।
दूल्हा इतना शांत क्यों है? जैसे उसे सब पता हो। दुल्हन जब वेटर को देखती है तो उसकी सांसें रुक जाती हैं। यह वो पल है जब वह ठुकराकर पछताएगा, क्योंकि उसने अपने दिल की नहीं, समाज की सुनी। वेटर की वर्दी में छिपा वो इंसान जो कभी उसका सब कुछ था।
पिता बेटी का हाथ दूल्हे को सौंप रहे हैं, लेकिन उनकी आँखों में चिंता है। क्या वे भी जानते हैं कि यह शादी गलत है? जब बेटी ठुकराकर पछताएगी, तो शायद पिता को भी अपनी गलती का एहसास होगा। वेटर की तरफ देखकर दुल्हन की आँखें नम हो जाती हैं।
वह कुछ नहीं बोलता, बस खड़ा रहता है और देखता रहता है। उसकी चुप्पी में इतना दर्द है कि पूरा हॉल शांत हो जाता है। जब दुल्हन ठुकराकर पछताएगी, तो शायद वह वेटर फिर से उसके जीवन में आएगा। उसकी आँखों में आंसू और होठों पर मुस्कान... यह कैसा विरोधाभास है?
दुल्हन का जोड़ा चमक रहा है, लेकिन लगता है जैसे वह जंजीरें पहनकर चल रही हो। वेटर की सादी वर्दी में ज्यादा इज्जत है। जब वह ठुकराकर पछताएगी, तो शायद उसे समझ आएगा कि असली दौलत प्यार है, पैसा नहीं। दूल्हे की बेरुखी सब कुछ बता रही है।