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ठुकराकर पछताएगावां51एपिसोड

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ठुकराकर पछताएगा

गौरी तीन साल से अर्जुन का पीछा कर रही थी। 1081वीं बार ठुकराने पर उसने कहा – बस। असल में वह दिल्ली की सबसे बड़ी अमीर घराने की बेटी थी। बचपन के दोस्त आदित्य से शर्त लगाई थी – गरीब बनकर अर्जुन को फँसाना। शर्त खत्म, गौरी असली अवतार में लौटी। अर्जुन को सच पता चला तो वह टूट गया। तनु के साथ मिलकर गौरी-आदित्य की शादी में तोड़फोड़ की कोशिश की, लेकिन उल्टा उसका ही सबकुछ बर्बाद हो गया। अनुवादित टमाटर लघु कहानी 'जब चाटने वाला नहीं बना, तो स्कूल का हैंडसम लड़का पछताने लगा', लेखक: 【नान ज़ियाओ फ़ेई】
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इस एपिसोड की समीक्षा

शराब की बोतलें और सच्चाई

टेबल पर पड़ी शराब की बोतलें बता रही हैं कि ये मुलाकात आसान नहीं होने वाली। जब इंसान सच्चाई का सामना करने से डरता है, तो वो शराब में सुकून ढूंढता है। लेकिन यहाँ तो लैपटॉप में छुपी सच्चाई ने सब कुछ खोल कर रख दिया। ठुकराकर पछताएगा की कहानी में यही वो पल होता है जब नशा उतर जाता है और हकीकत सामने आती है।

क्रिस्टल चैंडलियर का साक्षी

ऊपर लटका वो क्रिस्टल चैंडलियर जैसे इस पूरी कहानी का साक्षी बना हुआ है। नीचे बैठे दोनों किरदारों के बीच जो युद्ध चल रहा है, वो खामोशी से लड़ा जा रहा है। जब लैपटॉप खुलता है, तो लगता है जैसे चैंडलियर की रोशनी भी फीकी पड़ गई हो। ठुकराकर पछताएगा जैसे मोड़ पर इंसान को अपनी गलतियों का अहसास होता है।

टचपैड पर उंगलियां

जब उसकी उंगलियां लैपटॉप के टचपैड पर चल रही हैं, तो लगता है जैसे वो किसी बम को डिफ्यूज कर रही हो। हर क्लिक के साथ एक नया सच सामने आ रहा है। उसका चेहरा पढ़ना मुश्किल है, लेकिन उसकी आँखें सब कुछ कह रही हैं। ठुकराकर पछताएगा की स्थिति में इंसान वही करता है जो उसे सबसे मुश्किल लगता है - सच का सामना।

सोफे की दूरी

उसी सोफे पर बैठे होने के बावजूद उनके बीच की दूरी मीलों की लग रही है। ये फिजिकल दूरी नहीं, बल्कि इमोशनल गैप है जो लैपटॉप की तस्वीरों ने और बढ़ा दिया है। जब वो एक-दूसरे को देखते हैं, तो लगता है जैसे वो अजनबी हों। ठुकराकर पछताएगा का दर्द यहीं है जब अपना ही शख्स पराया लगने लगता है।

नीली रोशनी का जादू

कमरे की नीली और बैंगनी लाइटिंग ने पूरे माहौल को एक अलग ही डायमेंशन दे दिया है। जब वो दोनों सोफे पर बैठे हैं और बीच में वो लैपटॉप है, तो लगता है जैसे कोई बड़ा फैसला होने वाला हो। ठुकराकर पछताएगा की थीम यहाँ बहुत गहराई से उभरती है। हर फ्रेम में एक कहानी छुपी है जो दर्शक को बांधे रखती है।

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