पूरे हंगामे के बीच वो लड़की बिल्कुल शांत खड़ी थी, जैसे सब कुछ पहले से तय हो। उसकी आँखों में गुस्सा नहीं, बस एक अजीब सी संतुष्टि थी। जब मैनेजर जियांग लोंग चिल्ला रहा था, तब भी वो बिना हिले खड़ी रही। ठुकराकर पछताएगा जैसी कहानियों में ऐसे किरदार ही असली हीरो होते हैं जो बिना बोले सब कह जाते हैं। उसकी स्माइल देखकर लगता है कि बदला मीठा होता है।
जैसे ही भूरे सूट वाला बॉस अंदर आया, पूरे कमरे का माहौल बदल गया। मैनेजर जियांग लोंग का चेहरा पीला पड़ गया और वो कुछ बोलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाया। ये सीन बताता है कि असली पावर किसके पास होती है। ठुकराकर पछताएगा वाली फीलिंग तब आती है जब आपको एहसास होता है कि आपने गलत इंसान को चुनौती दी थी। बॉस की एक नज़र में सब कुछ तय हो गया।
नीली यूनिफॉर्म वाली वेट्रेस की स्माइल देखकर लगता है कि वो सब कुछ जानती थी। जब मैनेजर जियांग लोंग को निकाला जा रहा था, तब भी वो मुस्कुराती रही। शायद वो इसी पल का इंतज़ार कर रही थी। ठुकराकर पछताएगा जैसी कहानियों में ऐसे छोटे किरदार भी बड़ी भूमिका निभाते हैं। उसकी आँखों में चमक थी जो बता रही थी कि न्याय हो गया है।
मैनेजर जियांग लोंग का गुस्सा और सफ़ेद कार्डिगन वाली लड़की का शांत रहना - ये दोनों एक दूसरे के बिल्कुल विपरीत थे। गुस्से में इंसान क्या-क्या कर बैठता है, ये इस सीन में साफ़ दिखता है। ठुकराकर पछताएगा वाला सबक यहीं से मिलता है कि शांत दिमाग से काम लेना चाहिए। लड़की की चुप्पी ने मैनेजर की चीखों को हरा दिया।
गोल्डन लाइट और बड़े टेबल वाले इस कमरे में जो तनाव था, वो हर फ्रेम में महसूस किया जा सकता था। जब मैनेजर जियांग लोंग चिल्ला रहा था, तो बाकी सब चुपचाप खड़े थे। ठुकराकर पछताएगा जैसी स्थिति में इंसान अकेला पड़ जाता है, जैसा कि इस सीन में हुआ। खाने की प्लेटें वैसे ही रखी थीं, जैसे सब कुछ रुक गया हो।