लड़कियों के हॉस्टल के बाहर खड़ा होकर वह लड़का कितना बेबस लग रहा है। पीछे का बोर्ड साफ़ कह रहा है कि लड़कों के लिए आगे बढ़ना मना है, पर प्यार की कोई सीमा नहीं होती। उसने हाथ पकड़ने की कोशिश की, पर वह पीछे हट गई। यह दूरी सिर्फ कदमों की नहीं, रिश्तों की भी है। ठुकराकर पछताएगा में ऐसे ही पल होते हैं जो यादगार बन जाते हैं। रात की रोशनी और उनकी चुप्पी सब कुछ कह रही है।
लड़की के हाथ में जो किताब है, वह शायद उनकी कहानी का प्रतीक है। वह उसे सीने से लगाए हुए है, जैसे अपने राज़ों को छुपा रही हो। लड़का उसे समझाने की कोशिश कर रहा है, पर शब्द बेअसर लग रहे हैं। ठुकराकर पछताएगा की यह कहानी हमें बताती है कि कभी-कभी सच्चाई कड़वी होती है। उनकी आँखों का मिलना और फिर नज़रें चुरा लेना, यह सब इतना असली लगता है।
जब वह लड़का उसका हाथ पकड़ता है, तो लगता है शायद सब ठीक हो जाएगा, पर वह झटके से हाथ छुड़ा लेती है। यह छोटा सा एक्शन उनके रिश्ते की बड़ी दरार दिखा देता है। ठुकराकर पछताएगा में ऐसे ही पल होते हैं जो दर्शकों को रुला देते हैं। पीली कार्डिगन और काला स्वेटर, रंगों का यह विरोधाभास उनके अलग अलग रास्तों को दर्शाता है। रात की ठंडक और उनके बीच की दूरी बराबर लग रही है।
इस दृश्य में संवाद कम हैं, पर आँखें सब कुछ बोल रही हैं। लड़के की आँखों में पछतावा और लड़की की आँखों में निराशा साफ़ झलक रही है। ठुकराकर पछताएगा की कहानी में यही तो सबसे खास बात है कि बिना बोले सब समझ आ जाता है। जब वह मुड़कर देखती है, तो लगता है शायद वह माफ़ कर देगी, पर फिर वह आगे बढ़ जाती है। यह अनिश्चितता दर्शकों को बांधे रखती है।
पीछे से गुजरने वाले छात्र हँस रहे हैं, पर इन दोनों के बीच एक अजीब सी खामोशी है। यह भीड़ में अकेलापन इतना गहरा है कि रुला देता है। ठुकराकर पछताएगा में दिखाया गया है कि कैसे प्यार में इंसान अकेला पड़ जाता है। लड़की का अकेले चलना और लड़के का वहीं खड़ा रहना, यह दृश्य दिल को छू लेता है। शायद यही जीवन की सच्चाई है।