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ठुकराकर पछताएगावां15एपिसोड

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ठुकराकर पछताएगा

गौरी तीन साल से अर्जुन का पीछा कर रही थी। 1081वीं बार ठुकराने पर उसने कहा – बस। असल में वह दिल्ली की सबसे बड़ी अमीर घराने की बेटी थी। बचपन के दोस्त आदित्य से शर्त लगाई थी – गरीब बनकर अर्जुन को फँसाना। शर्त खत्म, गौरी असली अवतार में लौटी। अर्जुन को सच पता चला तो वह टूट गया। तनु के साथ मिलकर गौरी-आदित्य की शादी में तोड़फोड़ की कोशिश की, लेकिन उल्टा उसका ही सबकुछ बर्बाद हो गया। अनुवादित टमाटर लघु कहानी 'जब चाटने वाला नहीं बना, तो स्कूल का हैंडसम लड़का पछताने लगा', लेखक: 【नान ज़ियाओ फ़ेई】
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इस एपिसोड की समीक्षा

नीली ड्रेस वाली लड़की का गुस्सा

नीली और सफेद ड्रेस पहनी लड़की का गुस्सा साफ दिखाई दे रहा है। उसकी आँखों में जो चिढ़ है, वह बताती है कि वह इस स्थिति से कितनी परेशान है। ठुकराकर पछताएगा में ऐसे दृश्य बहुत महत्वपूर्ण हैं जहाँ बिना कुछ कहे ही सब कुछ समझ आ जाता है। उसका हाथ हिलाना और मुँह बनाना बताता है कि वह हार मानने वाली नहीं है।

लड़के की चुप्पी का मतलब

ग्रे शर्ट वाला लड़का पूरे दृश्य में शांत खड़ा है, लेकिन उसकी आँखें सब कुछ देख रही हैं। वह कुछ बोल नहीं रहा है, शायद वह इस झगड़े में पड़ना नहीं चाहता या फिर वह किसी के पक्ष में है। ठुकराकर पछताएगा की कहानी में ऐसे किरदार बहुत महत्वपूर्ण होते हैं जो चुप रहकर भी सब कुछ सुनते हैं। उसकी यह चुप्पी आगे चलकर बड़ा धमाका कर सकती है।

चेकर्ड शर्ट वाली लड़की का आत्मविश्वास

काले चश्मे और चेकर्ड शर्ट वाली लड़की का आत्मविश्वास देखने लायक है। वह बाँहें बाँधकर खड़ी है और बिना डरे सबकी बात सुन रही है। लगता है जैसे वह इस स्थिति को संभालने के लिए तैयार है। ठुकराकर पछताएगा में ऐसे किरदार कहानी को आगे बढ़ाते हैं। उसकी आँखों में जो चमक है, वह बताती है कि वह हारने वाली नहीं है।

सफेद कोट वाली लड़की का रिएक्शन

सफेद कोट पहनी लड़की की प्रतिक्रिया बहुत ही स्वाभाविक है। वह पहले हैरान होती है, फिर गुस्सा होती है और फिर मुस्कुराती है। यह भावनाओं का उतार-चढ़ाव बताता है कि वह इस स्थिति से कैसे निपट रही है। ठुकराकर पछताएगा में ऐसे दृश्य बहुत अच्छे लगते हैं जहाँ किरदारों की भावनाएँ साफ दिखाई देती हैं। उसकी यह मुस्कान आगे की कहानी का संकेत दे सकती है।

कैफेटेरिया का माहौल

इस दृश्य में कैफेटेरिया का माहौल बहुत ही अच्छे से दिखाया गया है। पीछे लोग खाना खा रहे हैं, लेकिन इन पाँच लोगों के बीच जो नाटक चल रहा है, वह सबका ध्यान खींच रहा है। ठुकराकर पछताएगा की कहानी में ऐसे परिवेश बहुत महत्वपूर्ण हैं जो कहानी को यथार्थवादी बनाते हैं। यह जगह एक आम कॉलेज कैफेटेरिया जैसी लगती है जहाँ ऐसे नाटक रोज होते हैं।

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