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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कनवां47एपिसोड

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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन

पुरातात्विक संरक्षिका चंद्रिका एक उपन्यास में फँसकर रोशनी राजकुमारी की जगह ले लेती है। कहानी के अनुसार तीन दिन बाद ज़ालिम शासक रुद्रप्रताप उसे मार डालेगा। जान बचाने के लिए वह उससे उलझती है, हर जाल को चतुराई से नाकाम करती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच कशिश बढ़ती है। चंद्रिका रुद्रप्रताप के बचपन के घावों को भरती है और उसके अकेले दिल को गर्माहट देती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

राजा का दर्द और रानी का गुस्सा

इस दृश्य में राजा की उदासी और रानी की नाराजगी साफ दिखती है। जब राजा सोच में डूबा है, तो रानी को लगता है कि उसे नजरअंदाज किया जा रहा है। चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन में यह तनाव बहुत गहरा है। रानी के चेहरे पर गुस्सा और आँखों में आंसू देखकर दिल दहल जाता है। राजा का वह पुराना पेंडेंट देखना और फिर रानी को तोहफे देना, सब कुछ एक बड़ी गलतफहमी की ओर इशारा करता है। यह ड्रामा बहुत ही इमोशनल है और दर्शकों को बांधे रखता है।