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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कनवां31एपिसोड

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चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन

पुरातात्विक संरक्षिका चंद्रिका एक उपन्यास में फँसकर रोशनी राजकुमारी की जगह ले लेती है। कहानी के अनुसार तीन दिन बाद ज़ालिम शासक रुद्रप्रताप उसे मार डालेगा। जान बचाने के लिए वह उससे उलझती है, हर जाल को चतुराई से नाकाम करती है। धीरे-धीरे दोनों के बीच कशिश बढ़ती है। चंद्रिका रुद्रप्रताप के बचपन के घावों को भरती है और उसके अकेले दिल को गर्माहट देती है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

रात की नींद में छिपा दर्द

चाँद का कशिश, ज़ालिम की धड़कन में बिस्तर पर सोती हुई नायिका की मासूमियत देखकर दिल पसीज गया। जब वह जमीन पर गिरती है और उसकी आँखों में डर झलकता है, तो लगता है जैसे पूरी दुनिया उसके खिलाफ हो गई हो। राजकुमार का चेहरा भावनाओं से भरा है—गुस्सा, पश्चाताप, और कुछ अनकहा सा। फिर वह टूटा हुआ पेंडेंट उठाता है, जैसे कोई खोया हुआ राज़ मिल गया हो। दो सखियों का गले लगना और आँसू बहाना—यह सब इतना सच्चा लगता है कि लगता है मैं भी वहीं खड़ी हूँ। नेटशॉर्ट ऐप पर ऐसे दृश्य देखकर लगता है जैसे कोई अपनी कहानी सुन रहा हो।