जब वो खटिया पर लेटी थी और आँखों में आँसू थे, दिल पसीज गया। परिचारिकाएँ भाग रही थीं और वो काग़ज़ पर साइन कर रही थी। चोटिल हाथ से दस्तख़त करते वक़्त जो दर्द था, वो शब्दों में बयां नहीं। मेरे हाथ में आज़ादी ने इस दृश्य से ही बांध लिया। माँ बनने का संघर्ष इतना खूबसूरत और दर्दनाक कभी नहीं देखा।
बच्चे को गोद में लेते ही उसकी आँखों में जो चमक आई, वो देखकर रूला दिया। इतनी तकलीफ के बाद भी मुस्कान थी। परिचारिका ने जब बच्चा सौंपा, तो लगा जैसे दुनिया मिल गई। मेरे हाथ में आज़ादी की कहानी में ये पल सबसे कीमती है। माँ का प्यार और त्याग सबके सामने है। हर पल संघर्ष था।
हवाई अड्डे की खिड़की से जहाज़ देखते हुए वो अकेली खड़ी थी। कंधे पर बच्चा और हाथ में यात्रा दस्तावेज़। पीछे पर्दे पर डेमियन की खबर चल रही थी, पर वो चुप थी। मेरे हाथ में आज़ादी में ये दृश्य बहुत गहरा था। पुरानी ज़िंदगी छोड़कर नई शुरुआत करना आसान नहीं होता। सब छोड़ दिया।
बड़े पर्दे पर डेमियन किनकेड की खबरें चल रही थीं, लेकिन वो वहाँ नहीं थी। दूसरी औरत के साथ उसकी तस्वीर देखकर दिल टूट गया। मेरे हाथ में आज़ादी ने दिखाया कैसे धोखा मिलता है। वो चुपचाप बच्चे को लेकर चली गई, बिना किसी शोर के। ये खामोशी सबसे बड़ा शोर थी। दर्द था।
हवाई जहाज़ की खिड़की से बादल देखते हुए वो बच्चे को सुला रही थी। अब वो अकेली नहीं थी, उसके पास उसका हिस्सा था। मेरे हाथ में आज़ादी का सफर यहाँ से शुरू हुआ। नीली पोशाक में वो बहुत सुंदर लग रही थी। उम्मीद की किरण बादलों में छिपी थी। सफर जारी था। नेटशॉर्ट पर देखना सुकून देने वाला था।
हाथ में चोट थी फिर भी उसने पेन पकड़ा। काग़ज़ पर साइन करते वक़्त जो दर्द था, वो सिर्फ शारीरिक नहीं था। मेरे हाथ में आज़ादी में ये दृश्य रोंगटे खड़े कर देता है। उसने अपनी आज़ादी के लिए कीमत चुकाई। हर बूंद खून की कीमत थी। बहुत गहरा असर हुआ।
परिचारिकाएँ उसे धक्का देते हुए ले जा रही थीं, एक ने रेडियो पर बात की। हड़बड़ी साफ दिख रही थी। मेरे हाथ में आज़ादी में आपातकाल का माहौल बहुत असली लगा। वो लेटी थी बस देखती रही। मदद मिल रही थी पर दिल अकेला था। सब तेज़ी से हो रहा था।
जब वो रो रही थी, तो लगा जैसे आसमान टूट पड़ा हो। आँखों से आँसू बह रहे थे और वो बच्चे को देख रही थी। मेरे हाथ में आज़ादी ने जज़्बात को बहुत गहराई से दिखाया। हर आँसू में एक कहानी छिपी थी। दर्द और खुशी का मिलन था ये। दिल भर आया।
बिना किसी सहारे के वो हवाई अड्डे पर खड़ी थी। बच्चे को सीने से लगाए हुए वो मज़बूत लग रही थी। मेरे हाथ में आज़ादी यही सिखाता है कि औरत कितनी ताकतवर होती है। उसने हार नहीं मानी। नई उड़ान भरने का वक़्त था। सबके सामने मिसाल थी।
अस्पताल से लेकर हवाई जहाज़ तक का सफर बहुत भावुक था। उसने सब कुछ पीछे छोड़ दिया। मेरे हाथ में आज़ादी की कहानी दिल को छू लेती है। डेमियन की खबरें मायने नहीं रखतीं अब। बच्चा ही उसकी दुनिया है। ये अंत नहीं नई शुरुआत है। सफर खूबसूरत था।