शुरुआत में गरीब प्रेमी की मासूमियत और सादगी देखकर दिल पिघल जाता है। लीला के साथ बिताए वो पल बिल्कुल सच्चे लगते थे, पर पैसों की तंगी ने सब कुछ बदल दिया। मेरे हाथ में आज़ादी देखकर लगा कि कभी-कभी मजबूरी इंसान को कहां पहुंचा देती है। उसकी आंखों में बेचैनी साफ झलक रही थी जब वह बिलों के ढेर के बीच खड़ा था। यह दृश्य बहुत दर्दनाक लगा।
लाल साड़ी में लीला की चमक और खूबसूरती हमेशा से सबकी नजरों में अलग थी। जब वह अपने प्रेमी के साथ खाना खा रही थी, तो लगा सब कुछ ठीक है। पर मेरे हाथ में आज़ादी की कहानी बताती है कि खुशियां कितनी नाजुक होती हैं। गर्भावस्था के समय उसकी मुस्कान में एक अलग ही सुकून था जो बाद में गायब हो गया। यह बदलाव चौंकाने वाला था।
टीशर्ट पर लिखा शब्द उसकी वफादारी और प्यार बता रहा था, पर जेब खाली थी। मेरे हाथ में आज़ादी में दिखाया गया है कि प्यार अकेले पेट नहीं भर सकता। जब वह सिर पकड़कर बैठा था, तो लगा अब सब खत्म होने वाला है। लीला का जाना शायद उसकी मजबूरी थी या कोई बड़ी चाल। समय ने सब कुछ पलट दिया।
सूटकेस लेकर जाते हुए लीला का अंदाज और चलने का तरीका देखकर रोंगटे खड़े हो गए। वह पीछे मुड़कर मुस्कुराई, पर उसकी आंखों में ठंडक साफ दिख रही थी। मेरे हाथ में आज़ादी के इस मोड़ पर लगा कि रिश्तों की कीमत क्या होती है। गरीब प्रेमी का टूटना बिल्कुल असली लगा दर्शकों को। कोई भी यह उम्मीद नहीं कर सकता।
व्यापारी के महल जैसे बड़े घर में भी सुकून और चैन नहीं था। कांच टूटने की तेज आवाज ने सारे सन्नाटे को चीर दिया। मेरे हाथ में आज़ादी में दिखाया गया है कि दौलत से घाव नहीं भरते। वह सिर पकड़कर बैठा था जैसे कोई बड़ी मुसीबत आने वाली हो। काश सब इतना जटिल न होता। धन सब कुछ नहीं होता साबित हुआ।
लीला अब उस व्यापारी के सामने खड़ी थी जैसे कोई रानी हो। उसकी पकड़ मजबूत थी और नजरें तीखी थीं। मेरे हाथ में आज़ादी में पावर डायनामिक बहुत दिलचस्प था। जब उसने उसकी टाई पकड़ी, तो लगा अब कौन असली मालिक है यह साफ हो गया है। उसका रौबदार अंदाज काबिले तारीफ था।
सोफे पर बैठे दोनों के बीच की दूरी और खामोशी देखकर अजीब लगा। लीला की खामोशी शोर मचा रही थी और सब कुछ कह रही थी। मेरे हाथ में आज़ादी के इस सीन में तनाव को महसूस किया जा सकता था। अमीर पति की बेचैनी साफ झलक रही थी जब वह उसकी ओर देख भी नहीं पा रहा था। रिश्तों में दरारें साफ दिख रही थीं।
अखबार की सुर्खियों ने कंपनी के नुकसान और हार की बात कही। कंप्यूटर स्क्रीन पर वह खबर देखकर सब कुछ समझ आ गया। मेरे हाथ में आज़ादी में कारोबारी धोखा भी दिखाया गया है। उस व्यापारी के चेहरे पर हार साफ दिख रही थी जब उसने खबर पढ़ी। कारोबार में जोखिम हमेशा रहता है।
रात के शहर की रोशनी में लीला बिल्कुल अकेली खड़ी थी। वाइन का ग्लास हाथ में था पर चेहरे पर कोई खुशी नहीं थी। मेरे हाथ में आज़ादी के अंत में लगा कि उसने सब पा लिया पर खुद को खो दिया। वह खिड़की से बाहर देख रही थी जैसे कुछ ढूंढ रही हो। शायद वह अपने पुराने प्यार को याद कर रही थी।
यह कहानी सिर्फ प्यार की नहीं, सत्ता और ताकत की भी है। लीला ने अपनी शर्तों पर जीवन जिया और सबको हैरान किया। मेरे हाथ में आज़ादी ने दिखाया कि आज़ादी की कीमत कितनी भारी हो सकती है। दोनों साथियों का जीवन उसने अपने इशारों पर नाचा दिया जो हैरान करने वाला था। यह कहानी लंबे समय तक याद रहेगी।