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मेरे हाथ में आज़ादीवां18एपिसोड

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मेरे हाथ में आज़ादी

गर्भवती और बीमार नायिका अस्पताल में पति को दूसरी औरत से लिपटे देखती है – वह भी गर्भवती है। वह मुस्कुराकर तलाकनामे पर दस्तखत कर देती है। वह जो चीज़ साथ ले जाती है, वह उसके लिए हमेशा के लिए गुम हो जाती है। बदला अब शुरू होगा...
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इस एपिसोड की समीक्षा

लाल साड़ी का राज

लाल साड़ी वाली की खुशी अचानक गुस्से में बदल जाती है। कागज फाड़ना बहुत इमोशनल सीन था। मेरे हाथ में आज़ादी में ऐसे ट्विस्ट देखकर दिल दंग रह जाता है। उसकी आंखों में दर्द साफ दिख रहा था जब उसने सूटकेस पैक किया। लगता है कोई बड़ा धोखा हुआ है।

टूटी हुई तस्वीरें

टैबलेट पर फोटो देखकर उसका रंग बदल गया। शायद वो तस्वीर ही वजह थी सब बर्बाद होने की। मेरे हाथ में आज़ादी की कहानी में ये रहस्य बहुत गहरा है। अस्पताल वाला लड़का भी उसी से जुड़ा लगता है। कौन है वो आदमी? सस्पेंस बना हुआ है।

अस्पताल का सच

अस्पताल के बिस्तर पर वो लड़का रो रहा था। हरे पेंडेंट देखकर उसे क्या याद आया? मेरे हाथ में आज़ादी में हर छोटी चीज़ का मतलब है। काले सूट वाले व्यक्ति से उसकी बहस देखकर लगता है खतरा टल नहीं है। बहुत टेंशन हो रही है।

विदाई का पल

सूटकेस लेकर निकलते वक्त उसकी चाल में गुस्सा था। वो वापस नहीं आएगी ऐसा लग रहा है। मेरे हाथ में आज़ादी में मुख्य किरदार बहुत मजबूत दिखाई देती हैं। फर्श पर बिखरे कागज उसकी टूटी उम्मीदें हैं। कहानी आगे क्या मोड़ लेगी?

हाथ का निशान

हाथ वाला टैटू अचानक दिखाई दिया। क्या वो कोई गुंडा है या कोई और पहचान छिपा रहा है? मेरे हाथ में आज़ादी में ऐसे सीक्रेट्स बहुत हैं। अस्पताल का माहौल बहुत डरावना लग रहा था उस वक्त। मुझे अगला एपिसोड देखना है।

फोन की घंटी

फोन पर बात करते वक्त उसकी आवाज़ कांप रही थी। शायद कोई बुरी खबर मिली थी। मेरे हाथ में आज़ादी में हर कॉल किसी मुसीबत की घंटी है। लाल साड़ी बहुत सूट कर रही थी उसे। पर कहानी बहुत दुखी है।

काला साया

काले सूट वाला व्यक्ति चुपचाप चला गया। उसकी आंखों में कोई पछतावा नहीं था। मेरे हाथ में आज़ादी में विलेन ऐसा ही होता है। अस्पताल के कॉरिडोर में उसकी चलने की आवाज़ गूंज रही थी। बहुत गुस्सा आ रहा है।

शहर की रोशनी

शहर की रोशनी के सामने वो अकेली खड़ी थी। फिर सब बदल गया। मेरे हाथ में आज़ादी में सिटी व्यू बहुत खूबसूरत दिखाया गया है। पर अंदर का शोर ज्यादा था। काश सब ठीक होता। कहानी दिल को छू गई।

पेंडेंट का राज

मरीज ने गुस्से में उंगली उठाई। उसे धोखा लगा था उस आदमी से। मेरे हाथ में आज़ादी में रिश्तों की ये कशमकश बहुत अच्छी लगी। हरे पेंडेंट की क्या अहमियत है कोई बताए। मैं कन्फ्यूज हूं।

बंद दरवाजे

आखिर में दरवाजा बंद हुआ तो सन्नाटा छा गया। वो चली गई और पीछे बस यादें बचीं। मेरे हाथ में आज़ादी का ये एपिसोड बहुत भारी था। नेटशॉर्ट पर देखने का मज़ा आ गया। सब्र नहीं हो रहा अगले पार्ट का।