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मेरे हाथ में आज़ादीवां27एपिसोड

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मेरे हाथ में आज़ादी

गर्भवती और बीमार नायिका अस्पताल में पति को दूसरी औरत से लिपटे देखती है – वह भी गर्भवती है। वह मुस्कुराकर तलाकनामे पर दस्तखत कर देती है। वह जो चीज़ साथ ले जाती है, वह उसके लिए हमेशा के लिए गुम हो जाती है। बदला अब शुरू होगा...
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इस एपिसोड की समीक्षा

सबूत की घड़ी

जब उसने अपना मोबाइल दिखाया तो कमरे में गहरा सन्नाटा छा गया। होटल की वो बुकिंग्स किसी भी तरह का झूठ नहीं बोल सकती थीं। सबूत देखकर वो इंसान टूट सा गया था। मेरे हाथ में आज़ादी का यह सीन दिल को छू लेता है क्योंकि यह बहुत असली लगता है। उसकी आंखों में भरोसा टूटता साफ दिख रहा था। कोई चीख नहीं थी बस खामोशी थी जो सब कुछ कह रही थी।

घुटनों पर गिरा वो

उसका घुटनों पर गिरना देखकर अजीब सा लगा पर संतोष भी मिला। वो भीख मांग रहा था पर वो मूर्ति की तरह खड़ी रही। मेरे हाथ में आज़ादी में पावर डायनामिक्स पूरी तरह बदल गए। जब उसने उसके घुटनों को छुआ तो उसने पलक भी नहीं झपकाई। उसकी ताकत को सलाम है इस सीन में।

लिपस्टिक के निशान

कमीज पर लिपस्टिक के निशान और होटल की रसीदें सब कुछ खत्म कर देने के लिए काफी थीं। उसे कैसे लगा कि वो पकड़ी नहीं जाएगी? कमरे में तनाव को महसूस किया जा सकता था। मेरे हाथ में आज़ादी ऐसे ड्रामेटिक खुलासों में कभी निराश नहीं करता। उसकी प्रतिक्रिया देखकर मेरा दिल तेजी से धड़क रहा था। सच सामने आ गया था।

गुस्सा और भीख

एक पल वो भीख मांग रहा था और अगले ही पल गुस्से में था। यह भावनात्मक उतार चढ़ाव पागलपन भरा था। पर वो पीछे नहीं हटी। यह जटिलता मेरे हाथ में आज़ादी को जरूर देखने लायक बनाती है। उसे बहुत देर से अहसास हुआ कि उसने क्या खो दिया है। यहां की एक्टिंग बेहतरीन थी। दर्शक बांधे रहे।

पीठ फेरते हुए

जब उसने पीठ फेरी तो मुझे पता था कि सब खत्म हो गया है। इतनी गद्दारी के बाद कोई भी भीख इसे ठीक नहीं कर सकती। सिनेमेटोग्राफी ने उसके अकेलेपन को उजागर किया। मेरे हाथ में आज़ादी इस दर्द को पूरी तरह कैप्चर करता है। वो सिर ऊंचा करके चली गई। यह एक यादगार पल बन गया है सबके लिए।

कमरे का सन्नाटा

लग्जरी कमरा और टूटे हुए रिश्ते का कंट्रास्ट बहुत खूबसूरत था। अमीर माहौल पर गलत फैसले। मेरे हाथ में आज़ादी में बिना संवाद के तनाव बहुत कुछ कह गया। वहां सुई गिरने की आवाज भी सुनी जा सकती थी। विजुअल स्टोरीटेलिंग यहां कमाल की है। हर कोने में दर्द साफ झलक रहा था सीन में।

पछतावे का फायदा

फोटो देखकर उसके चेहरे पर सिर्फ पछतावा था। पर पछतावे से किए हुए काम मिटते नहीं हैं। उसे उन खोखली विनतियों से बेहतर कुछ मिलना चाहिए था। मेरे हाथ में आज़ादी हमें आत्म सम्मान के बारे में सिखाता है। मैं चाहती थी कि वो तुरंत वहां से चली जाए। उसका दर्द साफ दिख रहा था।

निराशा का पल

जिस तरह उसने निराशा में अपना सिर पकड़ लिया था उससे उसकी बेचैनी साफ थी। पर वो खेल खेलना बंद कर चुकी थी। मेरे हाथ में आज़ादी के इस ट्विस्ट ने मुझे सीट के किनारे बैठा दिया। टूटने के बाद भरोसा फिर से बनाना मुश्किल होता है। यह बहुत शक्तिशाली सीन था सबके लिए।

प्यार से नफरत

शुरू में वो एकदम सही जोड़े लग रहे थे पर मोबाइल ने सब बदल दिया। प्यार से नफरत तक का सफर अचानक था। मेरे हाथ में आज़ादी इन गहरे विषयों को बहुत खूबसूरती से पेश करता है। उसने चिल्लाया नहीं बस चली गई। इसने उसे ज्यादा चोट पहुंचाई। कहानी बहुत गहरी है।

आखिरी फैसला

इस एपिसोड ने मुझे बिना बोले कुछ किए छोड़ दिया। एक्टिंग, खामोशी और दर्द सब कुछ परफेक्ट था। मेरे हाथ में आज़ादी मेरी पसंदीदा सीरीज बनती जा रही है। आगे क्या होता है यह देखने का इंतजार नहीं हो रहा। उसने झूठे की जगह खुद को चुना। यह जीत उसकी थी।