जब नीली पोशाक वाली ने वह कागज़ात देखे, तो उसकी आँखों में आँसू थे। पति ने बिना सोचे समझे दस्तखत कर दिए। मेरे हाथ में आज़ादी ड्रामा में यह दृश्य दिल को छू लेता है। अमीरी के बीच भी वह अकेली महसूस कर रही थी। उसका दर्द साफ़ दिख रहा था जब वह सीढ़ियों पर खड़ी थी। बहुत ही दर्दनाक पल था यह।
लाल साड़ी वाली हमेशा मुस्कुराती रही, जबकि दूसरी रोती रही। पति ने हार का उपहार उसे दिया, जो बहुत चौंकाने वाला था। मेरे हाथ में आज़ादी की कहानी में धोखा साफ़ झलकता है। वह हार पहनकर बहुत खुश थी, पर क्या उसे सच पता है? यह सस्पेंस बना रहता है। देखने वाला हैरान रह जाता है।
वह हरा हार सिर्फ़ एक गहना नहीं, बल्कि एक वादा था जो टूट गया। पति ने उसे दूसरी को दे दिया, यह देखकर बुरा लगा। मेरे हाथ में आज़ादी में ऐसे पल बहुत गहरे हैं। नीली पोशाक वाली ने उसे वापस कर दिया, जो उसकी खुददारी दिखाता है। बहुत इमोशनल सीन था यह। सबकी आँखें नम हो गईं।
बड़ा घर, महंगी सजावट, पर दिल खाली हैं। पति और लाल साड़ी वाली खुश थे, पर नीली पोशाक वाली तड़प रही थी। मेरे हाथ में आज़ादी दिखाता है कि पैसा खुश नहीं खरीद सकता। रात के वक्त वह खिड़की के पास खड़ी थी, बिल्कुल अकेली। यह दृश्य बहुत भारी था। मन बहुत दुखी हुआ।
जब उसने कागज़ात के ढेर देखे, तो समझ गई कि सब खत्म हो गया। पति ने बिना बात किए साइन कर दिया। मेरे हाथ में आज़ादी में यह मोड़ बहुत तेज़ था। उसका चेहरा पीला पड़ गया था। क्या वह अपने बच्चे के लिए लड़ेगी? यह सवाल मन में आता है। कहानी बहुत आगे बढ़ गई।
दोनों गर्भवती हैं, पर उनकी किस्मत अलग है। एक को प्यार मिला, दूसरी को धोखा। मेरे हाथ में आज़ादी में यह तुलना बहुत तीखी है। नीली पोशाक वाली का दर्द देखकर रोना आता है। पति का व्यवहार बहुत क्रूर लग रहा था उस वक्त। कोई सहारा नहीं था उसका। बहुत बुरा लगा।
वह सीढ़ियों से ऊपर जाती है, जैसे अपनी उम्मीदें छोड़ रही हो। हर कदम भारी था। मेरे हाथ में आज़ादी में यह प्रतीकात्मक दृश्य बहुत सुंदर है। पति पीछे खड़ा रहा, बिना कुछ कहे। खामोशी सबसे ज्यादा शोर मचा रही थी उस घर में। सन्नाटा चीख रहा था वहां। दिल दहल गया।
एक वक्त वह पत्नी के साथ हंस रहा था, दूसरे वक्त दूसरी वाली के साथ। मेरे हाथ में आज़ादी में किरदार बहुत जटिल हैं। उसने हार देकर अपनी गलती छुपानी चाही। पर नीली पोशाक वाली सब समझ चुकी थी। अब वह क्या करेगी? सवाल बहुत बड़ा है। जवाब कोई नहीं है।
रात के वक्त घर बहुत खामोश था। नीली पोशाक वाली खिड़की से बाहर देख रही थी। मेरे हाथ में आज़ादी का अंत बहुत उदास है। पति और लाल साड़ी वाली सोफे पर बैठे थे, पीठ करके। रिश्ते टूटने की आवाज़ साफ़ सुनाई दी। दिल टूटने की आवाज़ थी। बहुत गहरा असर हुआ।
अंत में वह अकेली खड़ी थी, शायद नई शुरुआत के लिए। मेरे हाथ में आज़ादी का नाम सही है। उसे उस घर से आज़ादी मिलनी चाहिए। पति के पास सब कुछ था, पर इंसानियत नहीं। यह कहानी बहुत कुछ सिखाती है। बहुत गहरी कहानी है यह। सबको देखनी चाहिए।