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मेरे पापा, देश के हीरोवां25एपिसोड

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मेरे पापा, देश के हीरो

रोहन शर्मा अपनी बेटी रिया के लिए 15-मीटर मेक बनाता है। रिया गलती से उसे चला देती है, जिससे सेना का ध्यान रोहन पर पड़ता है। सेना के सहयोग से वह J50 फाइटर जेट बनाता है, बशुंधरा देश की साजिशों को नाकाम करता है, और महेंद्र देश की मिलिट्री ताकत बन जाता है। अंत में वह काव्या सिंह से शादी करके अपनी बेटी को पूरा परिवार देता है।
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इस एपिसोड की समीक्षा

उड़ान का जोश

जब पायलट कॉकपिट में बैठते हैं तो उनकी आंखों में एक अलग ही चमक होती है। मेरे पापा, देश के हीरो ने इस जुनून को बहुत खूबसूरती से दिखाया है। रनवे पर दौड़ते हुए जेट और फिर बादलों के ऊपर निकलना सच में दिल को छू लेता है। एनिमेशन की क्वालिटी भी शानदार है जो हर सीन को जीवंत बनाती है। नेटशॉर्ट ऐप पर देखने का अनुभव बहुत अच्छा था।

कमांडर की सख्त नजर

सफेद बालों वाले कमांडर का किरदार बहुत प्रभावशाली लगा। उनकी सख्त नजर में छिपी चिंता और गर्व दोनों साफ झलकते हैं। मेरे पापा, देश के हीरो में ऐसे सीन हैं जो बिना संवाद के ही कहानी कह देते हैं। जब वे रेडियो पर बात करते हैं तो लगता है कि कुछ बड़ा होने वाला है। ड्रामा और एक्शन का संतुलन बहुत बढ़िया है।

मैक स्पीड का कमाल

जब स्क्रीन पर मैक नंबर बढ़ता हुआ दिखा तो सांसें रुक गईं। सात मैक की रफ्तार कोई मजाक नहीं होती। मेरे पापा, देश के हीरो ने तेज गति वाली उड़ान को बहुत वास्तविक तरीके से पेश किया है। बादलों को चीरते हुए जेट का निकलना दृश्य रूप से बहुत भव्य लगता है। ऐसे एपिसोड बार बार देखने को मन करता है।

पायलट्स की तैयारी

शुरुआत में सभी पायलट की लाइन देखकर ही अंदाजा हो जाता है कि अनुशासन कितना कड़ा है। हरे रंग की वर्दी में सब बहुत पेशेवर लग रहे थे। मेरे पापा, देश के हीरो में छोटी छोटी बारीकियों पर ध्यान दिया गया है। जैसे दस्ताने पहनना और सीट बेल्ट लगाना। ये चीजें शो को असली बनाती हैं।

कंट्रोल रूम का टेंशन

जब जेट हवा में होता है तो कंट्रोल रूम में खड़े लोगों के चेहरे पर चिंता साफ दिखती है। बड़ी स्क्रीन पर सब कुछ देखना आसान नहीं होता। मेरे पापा, देश के हीरो ने ग्राउंड टीम की अहमियत को भी दिखाया है। नीली रोशनी में उनका खड़ा होना बहुत फिल्मी लग रहा था। हर पल की खबर होना जरूरी है।

लैंडिंग का पल

उड़ने के बाद वापस जमीन पर आना भी उतना ही मुश्किल होता है। जब जेट के पहिए रनवे को छूते हैं तो धुएं का निकलना बहुत असली लगा। मेरे पापा, देश के हीरो में कार्रवाई के दृश्य बहुत अच्छे से कोरियोग्राफ किए गए हैं। पायलट का चेहरा शांत था लेकिन माहौल में गर्माहट थी। यह सीन मुझे सबसे ज्यादा पसंद आया।

युवा पायलट का जज्बा

युवा पायलट की आंखों में देश के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा साफ दिख रहा था। हेडसेट लगाकर जब वे बात करते हैं तो आवाज में आत्मविश्वास था। मेरे पापा, देश के हीरो ने युवा पीढ़ी के सपनों को बहुत अच्छे से उभारा है। कॉकपिट के अंदर का नजरिया देखकर लगा कि मैं खुद उड़ रहा हूं। बहुत रोमांचक अनुभव था।

एयरपोर्ट का माहौल

एयरपोर्ट की पृष्ठभूमि और टावर का दिखाया जाना बहुत सटीक था। खुला आसमान और हरा भरा मैदान देखकर मन खुश हो गया। मेरे पापा, देश के हीरो में जगह का चयन आभासी तरीके से बहुत अच्छा है। जब कमांडर रनवे पर अकेले खड़े होते हैं तो उनका कद बहुत बड़ा लग रहा था। छायांकन लाजवाब है।

रेडियो संपर्क की अहमियत

हवा में पायलट और जमीन पर कमांडर के बीच रेडियो संपर्क बहुत जरूरी होता है। जब कमांडर वॉकी टॉकी पर बात कर रहे थे तो लग रहा था कि कोई मिशन शुरू हुआ है। मेरे पापा, देश के हीरो में संचार के महत्व को दिखाया गया है। आवाज की स्पष्टता और भाव दोनों ही दमदार थे। यह बारीकारी बहुत पसंद आई।

देश के लिए समर्पण

अंत में जब जेट बादलों के ऊपर निकल गया तो लगा कि जीत पक्की है। यह शो सिर्फ कार्रवाई नहीं बल्कि जज्बात भी दिखाता है। मेरे पापा, देश के हीरो ने देशभक्ति को बहुत ही सूक्ष्म तरीके से पेश किया है। पायलट की वर्दी पर लगे बैज भी उनकी उपलब्धियों की कहानी कहते हैं। ऐसे शो देखने के बाद गर्व महसूस होता है।