इस शो के शुरूआती दृश्य ही रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं। काली गाड़ियों का काफिला जब पहाड़ी मोड़ पर रुकता है, तो लगता है कुछ बड़ा होने वाला है। मेरे पापा, देश के हीरो में ऐसे साहसिक दृश्य देखकर दिल की धड़कन तेज हो जाती है। जंगल की खामोशी और तनावपूर्ण माहौल को बहुत खूबसूरती से दिखाया गया है। हर पल लगता है कि अब कुछ भी हो सकता है।
जब वो कमांडो गाड़ी से उतरता है, तो उसकी आंखों में गुस्सा साफ दिख रहा था। मेरे पापा, देश के हीरो की कहानी में ये झड़प बहुत अहम लगती है। बिना किसी डायलॉग के सिर्फ इशारों से जो तनाव बनाया गया है, वो कमाल का है। पीछे खड़े जवान भी किसी चुनौती से कम नहीं लग रहे थे। ऐसे सीन्स देखकर वीरता की असली परिभाषा समझ आती है।
अचानक वो बड़ा ट्रक मोड़ से निकलता है और सबकी सांसें रुक जाती हैं। मेरे पापा, देश के हीरो में हर वाहन का अपना एक मकसद लगता है। जब पीछे से और सैनिक उतरते हैं, तो लगता है अब मामला गंभीर हो गया है। रास्ते की संकीर्णता और खतरे को बहुत बारीकी से दिखाया गया है। ये दृश्य कहानी को एक नया मोड़ देता है।
जमीन से लेकर आसमान तक का सफर बहुत रोमांचक है। जब वो लड़ाकू विमान बादलों के ऊपर से गुजरते हैं, तो नजारा बेमिसाल लगता है। मेरे पापा, देश के हीरो में वायु सेना के जज्बे को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। पायलट की आंखों में जो जुनून है, वो हर युवा को प्रेरित कर सकता है। नीला आसमान और तेज रफ्तार देखकर मजा आ गया।
पायलट के चेहरे पर पसीने की बूंदें देखकर तनाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। मेरे पापा, देश के हीरो में तकनीकी बारीकियों को बहुत ध्यान से दिखाया गया है। रडार स्क्रीन पर लाल निशान देखकर लगता है कि दुश्मन करीब आ गया है। हर बटन दबाने के पीछे एक बड़ी जिम्मेदारी छिपी होती है। ये दृश्य बहुत ही गहन और इंटेंस है।