छोटी बच्ची की मासूमियत देखकर दिल पिघल गया। जब वह रोबोट के अंदर खुश थी फिर अचानक खतरा आ गया, तो मैं भी डर गई। मेरे पापा, देश के हीरो में ऐसा इमोशनल पल कम ही देखने को मिलता है। रोबोट का गिरना और फिर बचना सच में रोमांचक था। बच्ची की आंखों में डर साफ दिख रहा था। उसकी चीख सुनकर रूह कांप गई। कॉकपिट के अंदर का डर बाहर तक महसूस हुआ। यह सीन बहुत ही दिल को छूने वाला था। हर कोई इससे जुड़ महसूस करता है।
जनरल साहब की एंट्री ने पूरा सीन बदल दिया। उनकी आंखों में एक अलग ही चमक थी जब उन्होंने रोबोट को खड़ा होते देखा। मेरे पापा, देश के हीरो की कहानी में यह मोड़ बहुत जरूरी था। लगता है उन्हें इस मशीन से बहुत लगाव है। उनकी छड़ी और वर्दी देखकर ही रौंगटे खड़े हो जाते हैं। वह धीरे चलते हैं पर उनका हौसला बुलंद है। कमांडिंग स्टाइल देखकर लगता है कि वे अनुभवी हैं। सच में एक असली लीडर की तरह दिखे। उनकी बात मानने का मन करता है।
रात के समय शूटिंग का माहौल बहुत ही डार्क और मिस्ट्रीयस था। नीली रोशनी में रोबोट का चढ़ने वाला सीन बहुत ही शानदार लगा। मेरे पापा, देश के हीरो के विजुअल्स पर कोई शक नहीं कर सकता। जब वह चट्टान से फिसला तो सांस रुक गई थी। एक्शन और ड्रामा का सही संतुलन है। चांदनी रात में यह दृश्य बहुत ही खूबसूरत था। पहाड़ की ऊंचाई और खतरा साफ दिखाया गया। दर्शक भी उस पल को जीते हैं। रात का सन्नाटा तोड़ दिया।
महिला ऑफिसर का किरदार बहुत ही मजबूत दिखाया गया है। उसने न केवल कमांड संभाला बल्कि जनरल का भी सम्मान किया। मेरे पापा, देश के हीरो में महिला किरदारों को इस तरह दिखाना सराहनीय है। उसकी आंखों में जिम्मेदारी साफ झलक रही थी। सल्यूट वाला सीन तो दिल को छू गया। वह बिना डरे आगे बढ़ती है। उसकी वर्दी में एक अलग ही शान है। ऐसे किरदारों से प्रेरणा मिलती है। सबको सलाम करना चाहिए।
रेस्क्यू ऑपरेशन वाले सीन में बहुत ही तनाव था। सभी लोग मिलकर रोबोट को बाहर निकाल रहे थे। मेरे पापा, देश के हीरो में टीम वर्क को बहुत अच्छे से दिखाया गया है। लाइट्स और क्रेन का इस्तेमाल सीन को और भी ड्रामेटिक बना रहा था। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, किसी की जान थी। मिट्टी और कीचड़ में सब काम कर रहे थे। रात भर की मेहनत बेकार नहीं गई। बचाव कार्य बहुत ही प्रभावशाली था। सबकी मेहनत रंग लाई।