जब वह लड़की अपने पिता के घर पहुंचती है, तो नौकरों की कतार देखकर हैरान रह जाती है। मेरे अनजान अरबपति पिता की दौलत तो सबको पता है, लेकिन क्या वह अपनी बेटी को भी अपना सकता है? उस आदमी की आंखों में घमंड और लड़की की आंखों में डर साफ दिख रहा है। कार्ड देकर रिश्ते को खरीदने की कोशिश करना कितना दर्दनाक है! क्या पैसा सब कुछ खरीद सकता है? यह सीन दिल को छू लेता है।