प्लाज़ा होटल की खिड़की के उस पार चल रही दावत और बाहर खड़ी गरीब लड़की का दर्दनाक अंतर देखकर रूह कांप गई। जब उसकी बेटी ने माँ को पैसे दिए, तो आँखें नम हो गईं। अंदर बैठे अमीर परिवार की खुशियाँ और बाहर की ठिठुरन एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। मेरे अनजान अरबपति पिता की कहानी में यह मोड़ सबसे ज्यादा इमोशनल था। बेटे का व्यवहार और पिता की हैरानी देखकर लगता है कि असली रिश्ते पैसे से नहीं, एहसास से बनते हैं।