इस दृश्य में नायक की घबराहट साफ दिख रही है जब वह टेलीविजन पर चल रही भूतिया फिल्म देख रहा है। उसकी आंखों में साफ डर झलक रहा है और वह सहमा हुआ है। लाल पोशाक वाली नायिका बिल्कुल शांत है, जबकि सफेद बनियान वाला युवक कांप रहा है। यह विपरीत व्यवहार दर्शकों को हंसाता है और माहौल को हल्का करता है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ नाटक में ऐसे कॉमेडी हॉरर पल बहुत देखने को मिलते हैं जो दिल को छू लेते हैं और हंसाते हैं।
बेडरूम की रोशनी और पर्दे के पीछे की हल्की आवाज़ें डर का माहौल बना रही हैं और सन्नाटा छा गया है। नायिका का लाल लिबास खतरे का संकेत लगता है, पर वह तो बस फिल्म देख रही है और चैन है। नायक की हालत खराब है और वह छिपने की जगह ढूंढ रहा है बेचैन होकर। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की कहानी में यह टेंशन बहुत अच्छे से दिखाई गई है और निभाई गई है। हर कोई इस स्थिति में फंसना नहीं चाहेगा और डर के मारे कांप उठेगा रात में।
जब नायिका नायक के पास आई, तो उसकी आंखों में डर साफ था और वह पीछे हट रहा है। यह सिर्फ डर नहीं, बल्कि एक अजीब सी खिंचाव भी है जो दोनों के बीच महसूस किया जा सकता है। दोनों के बीच की केमिस्ट्री बहुत गजब की है और स्क्रीन पर चमक रही है साफ। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे रोमांटिक और डरावने पल एक साथ मिलते हैं जो कहानी को आगे बढ़ाते हैं। यह जोड़ी स्क्रीन पर बहुत अच्छी लग रही है और दर्शकों को पसंद आएगी।
स्क्रीन पर चल रही हॉरर फिल्म ने नायक की नींद उड़ा दी है और वह बेचैन हो गया है पूरी तरह। वह कंबल में छिपने की कोशिश कर रहा है ताकि उसे भूत न दिखे और बच सके। नायिका को इसका मजा आ रहा है और वह मुस्कुरा रही है धीरे से। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ के इस प्रकरण में डर और मजाक का सही मिश्रण है जो दर्शकों को बांधे रखता है। दर्शक भी अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे जब यह दृश्य देखेंगे और मजा लेंगे।
नायक के चेहरे के हावभाव बहुत एक्सप्रेसिव हैं और हर एमोशन साफ दिख रहा है स्क्रीन पर। वह चीखना चाहता है पर आवाज नहीं निकल रही है गले से डर के मारे। नायिका की मुस्कान में एक रहस्य है जो सुलझना बाकी है और जानना है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ नाटक के निर्देशक ने अभिनय पर बहुत ध्यान दिया है और यह साफ झलकता है। यह दृश्य लंबे समय तक दर्शकों की यादों में बना रहेगा और चर्चा का विषय बनेगा।
सोने का समय था पर भूत की फिल्म ने सब खराब कर दिया और नींद गायब हो गई रात भर। नायक बिस्तर पर करवटें बदल रहा है और डर के मारे कांप रहा है बुरी तरह। नायिका शांति से रिमोट पकड़े है और चैनल बदल रही है आराम से। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में ऐसे पल दिखाते हैं कि रात को सोना मुश्किल हो जाए और डर लगने लगे। सस्पेंस बना हुआ है और अगले दृश्य की उम्मीद बढ़ जाती है दर्शकों में।
लाल पोशाक और सफेद बनियान का रंग संयोजन बहुत आंखों को चुभने वाला है और सुंदर लग रहा है। यह विपरीत रंग उनके स्वभाव को भी दर्शाते हैं और कहानी कहते हैं साफ। एक शांत, एक घबराया हुआ और बेचैन है जो अलग दिखाई दे रहा है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ की दृश्य कथा कथन बहुत मजबूत है और हर फ्रेम में साफ झलकती है। रंगों का खेल कहानी को आगे बढ़ाता है और माहौल बनाता है डरावना।
हॉरर के बीच में कॉमेडी डालना आसान नहीं है, पर यहाँ यह बहुत अच्छा लगा और जचा है। नायक की हरकतें बच्चों जैसी हैं और मासूमियत भरी हैं जो हंसाती हैं। नायिका बड़ी बहन जैसी लग रही है और संभाल रही है सब कुछ। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ में हंसी और डर का संतुलन बहुत बारीकी से बनाया गया है और निभाया गया है। यह एक ताज़ा अनुभव है जो दर्शकों को हंसाता और डराता है दोनों।
अगले पल क्या होगा, यह सोचकर ही रोंगटे खड़े हो रहे हैं और डर लग रहा है सबको। नायक की सांसें तेज हो गई हैं और वह घबरा रहा है बुरी तरह। नायिका कुछ बोलने वाली है और रहस्य खोलेगी जल्द ही। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ के क्लाइमेक्स की ओर बढ़ते हुए यह दृश्य बहुत महत्वपूर्ण है और कहानी मोड़ता है। दर्शक की धड़कनें भी तेज हो जाती हैं और वे स्क्रीन से चिपक जाते हैं।
यह दृश्य बताता है कि डर सिर्फ भूत से नहीं, अपरिचित स्थितियों से भी लगता है और सताता है। नायक अब सहन नहीं कर पा रहा है और हार मान रहा है आखिरकार। नायिका की जीत हुई और वह मुस्कुरा रही है जीत के साथ। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ का यह अंश दर्शकों को बांधे रखता है और अंत तक खींच ले जाता है। अगला प्रकरण देखने की बेचैनी बढ़ गई है और इंतजार नहीं हो रहा।