इस दृश्य में तीन किरदारों का रवैया बहुत आक्रामक और शक्तिशाली लग रहा है। सफेद कोट वाला किरदार सामान के साथ खड़ा है और उसे बहुत असमंजस महसूस हो रहा है। लिफ्ट के अंदर का माहौल बहुत गर्म और तनावपूर्ण है। काले लेस वाली किरदार की आंखों में एक अलग ही चमक और रहस्य है। यह कहानी पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ जैसी जटिल और रोचक लग रही है। मुझे यह देखकर बहुत मजा आ रहा है और हर पल नया मोड़ आ रहा है। ऐसे नाटक देखना बहुत अच्छा लगता है।
दृश्य की शुरुआत में ही एक अजीब सी खामोशी छाई हुई है। होटल के हॉल में खड़ी किरदारें किसी इंतजार में लग रही हैं। सफेद कोट वाले का सामान देखकर लगता है कि वह अभी आया है। उनकी नजरें एक दूसरे को घूर रही हैं। यह स्थिति पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ के किसी पुराने किस्से जैसी लगती है। दृश्य कोण बहुत अच्छा है जो हर चेहरे के भाव को पकड़ रहा है। दर्शक के रूप में मैं इस कहानी का अगला हिस्सा देखने के लिए उत्सुक हूं।
लिफ्ट का दृश्य सबसे ज्यादा दिलचस्प है। जब वे सभी अंदर जाती हैं तो जगह कम पड़ जाती है। काले जैकेट वाली लड़की ने अपना कोट उतार दिया जो कि एक अजीब हरकत थी। सफेद फर वाली किरदार बहुत शांत खड़ी है। बीच में खड़ी लेस ड्रेस वाली किरदार सबसे ज्यादा प्रभावशाली लग रही है। यह नाटक पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ जैसा ही कुछ अनोखा है। मुझे इन किरदारों के बीच की रसायन विज्ञान बहुत पसंद आ रही है।
कपड़ों का चयन और सजावट बहुत ही शानदार है। काले रंग का प्रयोग बहुत ज्यादा किया गया है जो रहस्य को बढ़ाता है। सफेद कपड़ा वाले को भीड़ से अलग दिखा रहा है। ऐसा लगता है कि वह इन तीनों के बीच फंसा हुआ है। कहानी का नाम पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ सुनकर ही लगता है कि कुछ गहरा है। मैंने इस मंच पर कई नाटक देखे हैं लेकिन यह सबसे अलग है। हर झलक बहुत खूबसूरत तरीके से बनाया गया है।
किरदारों की शारीरिक भाषा बहुत स्पष्ट संदेश दे रही है। वे अपनी बांहें बांधे खड़ी हैं जो कि रक्षात्मक या आक्रामक हो सकता है। सफेद कोट वाले का चेहरा देखकर लगता है कि वह कुछ बोलना चाहता है लेकिन डर रहा है। यह खामोशी शोर से ज्यादा तेज है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ जैसी कहानियों में ऐसे ही पल महत्वपूर्ण होते हैं। मुझे यह नाटक बहुत पसंद आ रहा है और मैं इसे अपने दोस्तों को सुझाऊंगा।
जब लिफ्ट के दरवाजे बंद होते हैं तो माहौल और भी संकीर्ण हो जाता है। तीनों किरदारें एक दीवार की तरह खड़ी हैं। सफेद कोट वाले को पीछे धकेल दिया गया है। यह शक्ति संतुलन बहुत साफ दिखाई दे रहा है। काले लेस वाली किरदार की चश्मे वाली दिखावट बहुत अनोखी है। यह दृश्य पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ के किसी मोड़ जैसा लग रहा है। मुझे ऐसे रहस्य से भरे दृश्य बहुत पसंद हैं जो मन को बांधे रखते हैं।
सामान के साथ खड़ा होना यह दर्शाता है कि यात्रा अभी शुरू हुई है। सफेद कोट वाले के चेहरे पर पसीने की बूंदें साफ दिखाई दे रही हैं। किरदारें बिल्कुल तैयार और सजी हुई हैं। यह विरोधाभास बहुत दिलचस्प है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ जैसी कहानी में ऐसे विरोधाभास ही जान होते हैं। मैं इस अंश को बार बार देख रहा हूं ताकि कोई छोटी बारीकी छूट न जाए। हर अभिनय बहुत स्वाभाविक लग रहा है।
आंखों के संपर्क से ही पूरी कहानी कही जा रही है। कोई संवाद नहीं है फिर भी सब कुछ समझ आ रहा है। काले जैकेट वाली लड़की की हरकतें थोड़ी अजीब हैं। उसने अचानक कोट उतार कर सबको चौंका दिया। यह पल पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ जैसी कहानी का सबसे यादगार पल बन गया है। मुझे यह बिना बातचीत वाला दृश्य बहुत प्रभावशाली लगा। ऐसे दृश्य देखने का अनुभव बहुत अच्छा होता है।
होटल की सजावट और रोशनी बहुत लग्जरी लग रही है। पीछे फूलों की सजावट भी बहुत सुंदर है। लेकिन किरदारों के बीच का तनाव इस खूबसूरती को फीका कर रहा है। सफेद कोट वाला अकेला पड़ गया है इन तीनों के सामने। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ जैसी कहानियां अक्सर ऐसे ही माहौल में शुरू होती हैं। मुझे यह दृश्य बहुत फिल्मी लगा। मैं आगे क्या होगा यह जानने के लिए बेताब हूं।
अंत में जब सफेद कोट वाला लिफ्ट से बाहर निकलने की कोशिश करता है तो लगता है कि वह भागना चाहता है। किरदारें उसे जाने नहीं दे रही हैं। यह जकड़न बहुत अच्छे से दिखाई गई है। काले लेस वाली किरदार की मुस्कान में कुछ छिपा है। पहाड़ से उतरा खोदने कुआँ जैसी कहानी का अंत क्या होगा यह कोई नहीं जानता। मुझे यह लघु नाटक बहुत पसंद आया और मैं और भी देखना चाहता हूं।